आईसीआईसीआई बैंक घोटाला: ऐसे शुरू हुआ संदीप बख्शी का बैंक में रोल, पूरी कहानी
मुंबई- आईसीआईसीआई बैंक में हुए देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले में हर स्टेज पर लापरवाही बरतीगई। हालांकि, आईसीआईसीआई बैंक ने कहा कि संबंधित अवधियों के लिए प्रकाशित वित्तीय विवरणों पर जांच रिपोर्ट का प्रभाव नहीं है। बोर्ड के निर्णय के बाद, बैंक की लेखापरीक्षा समिति ने 6 जून, 2018 को न्यायमूर्ति श्रीकृष्णा को कोचर के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए ‘जांच प्रमुख’ नियुक्त किया था। नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में आईसीआईसीआई बैंक और उसकी सीईओ चंदा कोचर के खिलाफ उनके पति के वीडियोकॉन समूह के साथ व्यापारिक सौदों में ‘हितों के टकराव’ से संबंधित लिस्टिंग प्रकटीकरण मानदंडों के कथित उल्लंघन के लिए न्यायनिर्णय कार्यवाही का समर्थन किया गया है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आईसीआईसीआई बैंक को संबंधित सेबी नियमों के तहत इन चूकों के लिए 25 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है, जबकि कोचर पर 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना और अन्य दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है। अधिकारी ने आगे बताया कि इस मामले में सेबी द्वारा आईसीआईसीआई बैंक, कोचर और अन्य को जारी किए गए कारण बताओ नोटिसों के जवाबों पर विचार करने के बाद न्यायनिर्णय प्रक्रिया औपचारिक रूप से जल्द ही शुरू होगी।
सेबी की जांच के अलावा, आईसीआईसीआई बैंक के बोर्ड ने एक “स्वतंत्र जांच” भी गठित की और कोचर इस जांच के पूरा होने तक अवकाश पर चली गई हैं। बैंक द्वारा दायर एक नियामक रिपोर्ट के अनुसार, कोचर प्रबंध निदेशक और सीईओ के पद पर बनी रहेंगी, हालांकि समूह की जीवन बीमा शाखा के प्रमुख संदीप बख्शी को पूर्णकालिक निदेशक और सीओओ नियुक्त किया गया । बख्शी कोचर को रिपोर्ट कर रहे थे और उनकी अनुपस्थिति में दैनिक कार्यों का संचालन कर रहे थे।
बैंक ने कहा उसके बोर्ड को कोचर पर पूरा भरोसा है। नियामक सूत्रों के अनुसार, सेबी की प्रारंभिक जांच के निष्कर्ष कोचर, आईसीआईसीआई बैंक और वीडियोकॉन समूह से जुड़े मामले में नियामक द्वारा की गई पूछताछ पर आधारित हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कोचर ने स्वीकार किया है कि उनके पति दीपक कोचर के पिछले कई वर्षों से वीडियोकॉन समूह के साथ कई लेन-देन रहे हैं।

