2044 तक भारत और दक्षिण एशिया को चाहिए होंगे 3,300 नए विमान, बोइंग का अनुमान
मुंबई- अमेरिकी विमान निर्माता बोइंग का अनुमान है कि भारत और दक्षिण एशिया में हवाई यातायात की बढ़ती मांग के चलते 2044 तक एयरलाइंस कंपनियों को लगभग 3,300 नए विमानों की जरूरत होगी। अनुमानित डिलीवरी में लगभग 90 फीसदी (2,875) सिंगल आइल जेट या नैरो बॉडी विमान होंगे। वाइड बॉडी विमानों की संख्या 395 होगी।
बोइंग के यूरेशिया और भारतीय उपमहाद्वीप के कमर्शियल मार्केटिंग के प्रबंध निदेशक अश्विन नायडू ने कहा, दो दशकों में इस क्षेत्र की एयरलाइंस को लगभग 45,000 पायलट, 45,000 तकनीशियन और 51,000 केबिन क्रू की जरूरत होगी। भारत एक विकासशील बाजार है और देश में विमानों की संख्या में और वृद्धि होगी। भारत सबसे तेजी से विकसित होने वाला क्षेत्र है, जहां 20 वर्षों में विमानों का बेड़ा चार गुना हो जाएगा। बढ़ते मध्यम वर्ग, आर्थिक विकास और हवाई अड्डों तथा कनेक्टिविटी में निवेश के चलते भारत और दक्षिण एशिया में यात्री हवाई यातायात इस दौरान सालाना औसतन सात फीसदी की दर से बढ़ेगा।
विकास और रिप्लेसमेंट को ध्यान में रखते हुए भारतीय व दक्षिण एशियाई क्षेत्र के विमानों का बेड़ा दो दशकों में 795 से बढ़कर 2,925 हो जाएगा। भारत के अंतरराष्ट्रीय यात्री और मालवाहक यातायात के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित होने के साथ भारतीय और दक्षिण एशियाई एयरलाइंस से भी अपने लंबी दूरी के नेटवर्क का विस्तार और विविधीकरण करने की उम्मीद है। दक्षिण एशिया क्षेत्र के वाइडबॉडी विमानों का बेड़ा 2044 तक तीन गुना से अधिक हो जाएगा, क्योंकि एयरलाइंस लाखों भारतीय और दक्षिण एशियाई यात्रियों को मध्य पूर्व, यूरोप और उत्तरी अमेरिका सहित अंतरराष्ट्रीय बाजारों की यात्रा करने में सक्षम बनाएंगी।
195 अरब डॉलर की होगी जरूरत
बोइंग ने कहा, दक्षिण एशिया क्षेत्र के उद्योग में निवेश के लिए रखरखाव, मरम्मत और संशोधन, डिजिटल सेवाओं और प्रशिक्षण सहित विमानन सेवाओं में 195 अरब डॉलर से अधिक की जरूरत होगी। भारत में उच्च तकनीकी विनिर्माण वृद्धि और ई-कॉमर्स की बढ़ती भूमिका से हवाई मालवाहक बाजार को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि इससे अधिक मालवाहक विमानों की आवश्यकता बढ़ेगी। दक्षिण एशिया क्षेत्र में नए और परिवर्तित मालवाहक विमानों के बेड़े का आकार दो दशकों में वर्तमान आकार से पांच गुना बढ़ने की उम्मीद है।
भारत तीसरा सबसे बड़ा बाजार
भारत के लिए बोइंग के पूर्वानुमान पर वैश्विक एयरोस्पेस क्षेत्र में गहरी नजर रखी जाती है, क्योंकि अमेरिका और चीन के बाद भारत तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार है। इंडिगो और एअर इंडिया के नेतृत्व में भारत सबसे तेजी से विकसित होने वाला विमानन बाजार भी है। दुनिया में कई अन्य विमानन बाजार हैं जो इससे बड़े हैं, लेकिन अब वे उस मुकाम पर पहुंच गए हैं जहां वे बेड़े को बढ़ाने के बजाय मौजूदा बेड़े को बदल रहे हैं। भारत का नेटवर्क अब भी काफी हद तक दिल्ली और मुंबई पर केंद्रित है।

