अनिल अंबानी पर बैंक धोखाधड़ी मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, CBI-ED से 10 दिन में सीलबंद रिपोर्ट तलब
मुंबई- सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी पर चल रहे बैंक फ्रॉड मामले में शुक्रवार को नए नोटिस जारी किए हैं। ये नोटिस कोर्ट में दायर की गई पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन (PIL) पर सुनवाई के बाद जारी किए गए हैं। PIL में अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप और उसकी कंपनियों पर 1.5 लाख करोड़ रुपए बैंकिंग और कॉर्पोरेट फ्रॉड की कोर्ट मॉनिटर्ड जांच की मांग की गई है। इस पर कोर्ट ने CBI और ED से अंबानी के खिलाफ चल रही जांच पर 10 दिन में सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।
अंबानी समूह को आखिरी चेतावनी: मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ ने नोट किया कि नोटिस पहले भी दिए गए थे, लेकिन अब बॉम्बे हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि नोटिस अनिल अंबानी तक पहुंचें। जांच एजेंसियों को डेडलाइन: कोर्ट ने CBI और ED को अगले 10 दिनों के भीतर अपनी जांच की ‘स्टेटस रिपोर्ट’ दाखिल करने का आदेश दिया है। यह रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दी जाएगी।
प्रशांत भूषण के गंभीर आरोप: याचिकाकर्ता (पूर्व आईएएस ई.ए.एस. सरमा) की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने इसे “भारत के इतिहास का सबसे बड़ा कॉर्पोरेट फ्रॉड” बताया। उन्होंने दावा किया कि यह धोखाधड़ी 2007-08 से चल रही थी, लेकिन FIR केवल 2025 में दर्ज की गई।
बैंक अधिकारियों की मिलीभगत: भूषण ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियां उन बैंक अधिकारियों की जांच नहीं कर रही हैं, जिन्होंने कथित तौर पर फंड्स को डायवर्ट करने में अनिल अंबानी ग्रुप की मदद की। याचिका में आरोप है कि सार्वजनिक धन का व्यवस्थित रूप से दुरुपयोग किया गया और फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में हेराफेरी की गई।

