135 अरब डॉलर रेमिटेंस, 700 अरब डॉलर विदेशी भंडार: वैश्विक अर्थव्यवस्था का पावरहाउस बनता भारत

मुंबई- भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी मजबूती का लोहा एक बार फिर मनवाया है। इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार भारत ना केवल दुनिया का सबसे बड़ा रेमिटेंस हासिल करने वाला देश बना हुआ है, बल्कि विदेशी मुद्रा भंडार भी रिकॉर्ड उच्च स्तर के करीब पहुंच गया है। 2024-25 में भारत को कुल 135.4 अरब डॉलर का रेमिटेंस मिला। सबसे बड़ी बात यह रही कि अब भारत आने वाले पैसे में विकसित देशों की हिस्सेदारी बढ़ रही है। इस बात से पता चलता है कि विदेशों में भारतीय स्किल और प्रोफेशनल वर्कर्स की मांग और कमाई दोनों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है।

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 16 जनवरी तक 701.4 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। इस भंडार के जरिये देश लगभग 11 महीनों के आयात को कवर कर सकता है। साथ ही यह देश के कुल बकाया विदेशी कर्ज के 94 फीसदी हिस्से के बराबर है। विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी वैश्विक आर्थिक समस्या से निपटने के लिए एक लिक्विडिटी बफर देता है। दक्षिण एशिया में भारत के अंदर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) जबरदस्त तरीके से आया है। देश ने निवेश के मामले में इंडोनेशिया और वियतनाम को भी पीछे छोड़ दिया। ग्रीनफील्ड निवेश की बात करें तो 2024 में 1,000 से ज्यादा नई परियोजनाओं के साथ भारत दुनिया में चौथे स्थान पर रहा। डिजिटल निवेश के लिए 2020-24 के बीच भारत में 114 अरब डॉलर का सबसे ज्यादा डिजिटल निवेश आया।

जहां दुनिया के कई देश इस समय कर्ज के संकट से जूझ रहे हैं, वहीं भारत की स्थिति बहुत अच्छी है। देश पर बाहरी लोन और जीडीपी का रेश्यो सिर्फ 19.2% है और कुल कर्ज का 5 फीसदी से भी कम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्यात बढ़ाने के लिए विनिर्माण लागत को कम करना होगा। नवाचार, उत्पादकता के साथ देश की मुद्रा और अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।

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