नकदी संकट से राहत के लिए आरबीआई की बड़ी पहल, 6.39 लाख करोड़ की सरकारी प्रतिभूतियां खरीदीं

मुंबई- बैंकिंग सिस्टम में लगातार नकदी की समस्याओं को कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक कदम उठा रहा है। इसके तहत इसने चालू वित्त वर्ष में अब तक केंद्र सरकार की ओर से जारी किए गए कुल बॉन्डों के 47 फीसदी के बराबर सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद की है।

आरबीआई के आंकड़ों से पता चलता है कि केंद्र सरकार ने 4 अप्रैल, 2025 से इस वर्ष 13 फरवरी तक अपने सकल उधार कार्यक्रम के तहत सरकारी प्रतिभूतियां जारी करके 13.65 लाख करोड़ रुपये जुटाए। इसके समानांतर आरबीआई ने 6.39 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की खुले बाजार परिचालन (ओएमओ) खरीद नीलामी आयोजित की। इससे बैंकिंग प्रणाली में नकदी की स्थिरता बनी रही।

सरकार द्वारा लगातार उधार लेने के बीच बड़े पैमाने पर ये खरीददारी की गई, जिससे आम तौर पर बैंकिंग प्रणाली से तरलता कम हो जाती है और बॉन्ड की ब्याज दरों पर दबाव बढ़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सेकंडरी बाजार से बॉन्ड खरीदकर केंद्रीय बैंक ने नकदी बढ़ाई और बाजार की सुचारू स्थिति बनाए रखने में मदद की।

इस कदम से बैंकिंग प्रणाली को नकदी की कमी से राहत मिली और सरकारी प्रतिभूतियों की भारी आपूर्ति के बावजूद ब्याज दरों में अत्यधिक वृद्धि को रोका जा सका। इससे क्रेडिट वृद्धि को समर्थन देने के लिए प्रणाली में पर्याप्त धन भी सुनिश्चित हुआ। ओएमओ खरीद सहित आरबीआई द्वारा अपनाए गए विभिन्न उपायों ने टिकाऊ तरलता प्रदान की है और इस प्रक्रिया में वैश्विक बाजार की ताकतों से बढ़ते दबाव को कम किया है।

वित्त वर्ष 2025-26 के अधिकांश समय में तरलता अधिशेष में रही। हालांकि कुछ समय के लिए यह घाटे में भी चली गई। दिसंबर 2025 से, जब तरलता कम होने लगी और घाटे में चली गई, तब से आरबीआई ने ओएमओ खरीद अभियान तेज कर दिए हैं। बैंकिंग प्रणाली को तरलता प्रदान करके आरबीआई के हस्तक्षेप से मुद्रा बाजार दरों को नियंत्रित करने और ओवरनाइट दरों को रेपो दर के करीब बनाए रखने में भी मदद मिली।

जनवरी,2025 से फरवरी,2026 के बीच 10 वर्षीय बेंचमार्क बॉन्ड की ब्याज दर 6.30-6.70 प्रतिशत के दायरे में रही। सरकार ने 2026-27 के लिए 17.2 लाख करोड़ रुपये उधार लेने की योजना बनाई है, जो बाजार के 16.5-17 लाख करोड़ रुपये के अनुमान से काफी अधिक है। इस कारण सरकारी प्रतिभूतियों पर यील्ड में तीव्र वृद्धि हुई है।

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