Budget 2026: बजट 2026 में इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा दांव, कैपेक्स ₹12.2 लाख करोड़; 8 बड़े एलान
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करते हुए बुनियादी ढांचे और औद्योगिक आत्मनिर्भरता को नई रफ्तार देने का खाका खींचा है। अपने लगातार नौवें बजट भाषण में वित्त मंत्री ने आर्थिक विकास की गति को बनाए रखने के लिए पूंजीगत व्यय में लगभग 9 प्रतिशत की वृद्धि की घोषणा की है। इसके साथ ही, सरकार ने भविष्य की तकनीकों, एमएसएमई और ग्रीन एनर्जी के लिए कई नई योजनाओं का ऐलान किया है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पेश किए गए केंद्रीय बजट में सरकार की दीर्घकालिक विकास रणनीति का स्पष्ट खाका पेश किया है। अपने लगातार नौवें बजट भाषण में उन्होंने बुनियादी ढांचे, औद्योगिक आत्मनिर्भरता, हरित ऊर्जा, तकनीक और एमएसएमई सेक्टर को अर्थव्यवस्था के अगले इंजन के तौर पर सामने रखा। पूंजीगत व्यय में करीब 9 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए सरकार ने जहां इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण को प्राथमिकता दी है, वहीं रेयर अर्थ मिनरल्स, सेमीकंडक्टर, बायो-फार्मा और कार्बन कैप्चर जैसे भविष्य के क्षेत्रों में बड़े निवेश का रोडमैप भी रखा गया है।
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रह सकती है, और सरकार का कहना है कि यह बजट वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच देश की आर्थिक मजबूती को और मजबूत करेगा।
- इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए रिकॉर्ड कैपेक्स
सरकार ने वित्त वर्ष 2027 के लिए पूंजीगत व्यय का लक्ष्य बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। यह चालू वित्त वर्ष के 11.2 लाख करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 9 प्रतिशत अधिक है। वित्त मंत्री के मुताबिक, इस बढ़े हुए खर्च से सड़कों, रेलवे, शहरी परिवहन, बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को विस्तार मिलेगा, जिससे निवेश और रोजगार दोनों को गति मिलने की उम्मीद है।
- रेयर अर्थ कॉरिडोर से खनिज आत्मनिर्भरता
महत्वपूर्ण खनिजों में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में ‘रेयर अर्थ कॉरिडोर’ स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इन कॉरिडोर के तहत खनन से लेकर प्रोसेसिंग, अनुसंधान और विनिर्माण तक एकीकृत इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा।
नवंबर 2025 में शुरू की गई रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) योजना का विस्तार भी इसी दिशा में कदम माना जा रहा है, जिससे चीन सहित अन्य देशों पर आयात निर्भरता कम करने का लक्ष्य है।
- ‘बायो-फार्मा शक्ति’ से हेल्थकेयर को बढ़ावा
भारत को वैश्विक बायो-फार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए ‘बायो-फार्मा शक्ति’ कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। अगले पांच वर्षों में इसके लिए 10,000 करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे।
इस योजना के तहत तीन नए राष्ट्रीय संस्थानों की स्थापना और सात मौजूदा संस्थानों के उन्नयन का प्रस्ताव है। साथ ही, दवाओं की गुणवत्ता और नियामकीय निगरानी को मजबूत करने के लिए सेंट्रल ड्रग कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन के आधुनिकीकरण की भी घोषणा की गई है।
- सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स में नया दौर
इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए 40,000 करोड़ रुपये के खर्च का प्रस्ताव किया गया है। सेमीकंडक्टर मिशन 1.0 के बाद अब ‘सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ लॉन्च किया जाएगा, जो इक्विपमेंट, मटीरियल्स और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर केंद्रित होगा।
सरकार का मानना है कि इससे भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन में अपनी भूमिका और मजबूत कर सकेगा।
- एमएसएमई और टेक्सटाइल सेक्टर पर फोकस
छोटे और मझोले उद्योगों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए ‘चैम्पियन एसएमई’ तैयार करने हेतु 10,000 करोड़ रुपये का फंड प्रस्तावित किया गया है।
इसके अलावा:
तकनीकी वस्त्रों में वैल्यू एडिशन के लिए मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित होंगे।
200 पुराने औद्योगिक क्लस्टर्स को पुनर्जीवित करने के लिए विशेष योजना लाई जाएगी।
खादी और हैंडलूम को सशक्त करने के लिए ‘महात्मा गांधी ग्राम स्वराज’ पहल शुरू की जाएगी।
- ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर और कार्बन कैप्चर
पर्यावरण के अनुकूल विकास को बढ़ावा देने के लिए स्टील और सीमेंट जैसे ऊर्जा-गहन उद्योगों में कार्बन कैप्चर और यूटिलाइजेशन योजनाओं के लिए 20,000 करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव किया गया है।
सरकार का कहना है कि यह कदम भारत के नेट-जीरो लक्ष्यों की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
- इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड और हाई-स्पीड कॉरिडोर
निजी निवेश को आकर्षित करने और परियोजनाओं के जोखिम कम करने के लिए ‘इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड’ की स्थापना की जाएगी, जो कर्जदाताओं को आंशिक क्रेडिट गारंटी उपलब्ध कराएगा।
इसके साथ ही, प्रमुख शहरों को जोड़ने के लिए सात हाई-स्पीड कॉरिडोर विकसित करने का भी प्रस्ताव रखा गया है, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत घटने की उम्मीद है।
- बैंकिंग सुधार और म्युनिसिपल बॉन्ड्स को बढ़ावा
वित्त मंत्री ने ‘बैंकिंग फॉर विकसित भारत’ पर एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने की घोषणा की है।
नगर निकायों को पूंजी बाजार से संसाधन जुटाने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से, 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के सिंगल म्युनिसिपल बॉन्ड जारी करने वाले नगर निगमों को 100 करोड़ रुपये का इंसेंटिव दिया जाएगा।
इसके अलावा, ग्रामीण और पावर सेक्टर फाइनेंसिंग से जुड़ी संस्थाओं आरईसी और पीएफसी के पुनर्गठन का भी ऐलान किया गया है।
आर्थिक तस्वीर: विकास दर पर भरोसा
वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था ने राजकोषीय अनुशासन और सतत विकास का रास्ता अपनाया है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रह सकती है, जो वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की मजबूत स्थिति को दर्शाती है।

