राजनीति से दूर रहीं सुनेत्रा सत्ता के केंद्र में, महाराष्ट्र की राजनीति के इतिहास में दर्ज हुआ नाम
मुंबई- सुनेत्रा पवार ने शनिवार को महाराष्ट्र की राजनीति में अपना नाम दर्ज कराकर इतिहास रच दिया। वह राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बन गईं। यह उनके लिए एक नाटकीय बदलाव का प्रतीक है, जिसमें उन्होंने राजनीति से काफी हद तक दूर रहने वाले जीवन से सत्ता के केंद्र तक का सफर तय किया है। राजनेता की साधारण पत्नी से लेकर केंद्र में आने तक का सफर उनका कुछ फिल्मी स्टाइल में रहा है।
महाराष्ट्र के सबसे शक्तिशाली राजनीतिक परिवारों में से एक की छाया से निकलकर सुर्खियों में आईं सुनेत्रा पवार पति अजीत पवार के दुखद निधन के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) का नेतृत्व करने की चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी उनके सामने है। 62 वर्षीय राज्यसभा सांसद सुनेत्रा का भाजपा के नेतृत्व वाले राज्य मंत्रिमंडल में दूसरे नंबर पर आना एनसीपी के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत भी है। एनसीपी अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के 28 जनवरी को बारामती में विमान दुर्घटना में निधन के बाद सुनेत्रा को शनिवार को एनसीपी विधायक दल का नेता चुना गया।
मराठवाड़ा क्षेत्र के धाराशिव (पूर्व में उस्मानाबाद) के तेरा गांव की रहने वाली सुनेत्रा राजनीतिक परिवार से आती हैं। लेकिन अपने जीवन के अधिकांश समय तक वे स्वयं सक्रिय रूप से राजनीति में शामिल नहीं रहीं। उनके भाई पद्मसिंह पाटिल एनसीपी के वरिष्ठ नेता हैं। उनके पिता बाजीराव पाटिल मराठवाड़ा मुक्ति संघर्ष में शामिल थे, जो हैदराबाद राज्य के भारतीय संघ में विलय से पहले हुआ था। वाणिज्य स्नातक सुनेत्रा को चित्रकला, संगीत, फोटोग्राफी और कृषि में रुचि बताई जाती है। विवाह के बाद उन्होंने काटेवाड़ी गांव में सक्रिय रूप से खेती शुरू की।
शरद पवार द्वारा 1999 में स्थापित एनसीपी में जुलाई, 2023 में उनके भतीजे अजीत पवार के भाजपा और शिवसेना की महायुति सरकार में शामिल होने के बाद फूट पड़ गई। अजीत पवार को उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया गया और नवंबर, 2024 के विधानसभा चुनावों में महायुति गठबंधन की भारी जीत के बाद सत्ता में आई देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार में भी वे इसी पद पर बने रहे।
पहली बार चुनाव लड़ीं, ननद से हारीं
अपनी वेबसाइट पर एक उत्साही पर्यावरणविद् और सामाजिक उद्यमी के रूप में वर्णित सुनेत्रा पवार ने 2024 के लोकसभा चुनावों में चुनावी पदार्पण किया। उन्होंने पवार परिवार के गृह क्षेत्र बारामती में अपनी ननद और मौजूदा एनसीपी (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले को चुनौती दी। सुले से हारने के बाद वह राज्यसभा के लिए चुनी गईं। लेकिन उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत स्पष्ट रूप से हो चुकी थी। उनके बड़े बेटे, पार्थ पवार 2019 के लोकसभा चुनावों में मावल से असफल होने के बाद से राजनीति से दूर रहे हैं। छोटे बेटे जय एक उद्यमी हैं।
अजीत ने 1980 से शुरू की राजनीति, 2024 तक दूर रहीं सुनेत्रा
अजित पवार ने 1980 के दशक की शुरुआत में राजनीति में प्रवेश किया। सुनेत्रा पवार 2024 के आम चुनाव तक राजनीतिक सुर्खियों से काफी हद तक दूर रहीं। 2010 में उन्होंने पर्यावरण जागरूकता बढ़ाने और पर्यावरण के प्रति जागरूक समुदायों को बढ़ावा देने के लिए समर्पित एक गैर-सरकारी संगठन एनवायरनमेंट फोरम ऑफ इंडिया (ईएफओआई) की स्थापना की। उनके नेतृत्व में ईएफओआई ने भारत में इको-विलेज मॉडल की शुरुआत की, जो ग्रामीण विकास में पारिस्थितिक प्रथाओं को एकीकृत करने वाला एक अभिनव दृष्टिकोण है। उन्होंने जैव विविधता संरक्षण, लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण, जल संसाधन प्रबंधन और सूखा राहत के लिए भी अभियान चलाए हैं।
86 गांवों में स्वयं सहायता समूह आंदोलन का किया नेतृत्व
शरद पवार द्वारा स्थापित शिक्षण संस्थान विद्या प्रतिष्ठान की सुनेत्रा पवार ट्रस्टी हैं। उन्होंने फ्रांस स्थित विश्व उद्यमिता मंच के एक थिंक टैंक की सदस्य के रूप में सतत विकास और सामाजिक नवाचार पर अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। निर्मल ग्राम अभियान के तहत महाराष्ट्र के 86 गांवों में स्वयं सहायता समूह आंदोलन का नेतृत्व किया है। इसके तहत बारामती के एक छोटे से गांव काटेवाड़ी को एक पर्यावरण-अनुकूल गांव में परिवर्तित किया गया है, जहां स्वच्छता, स्वास्थ्य, सामुदायिक पशुधन प्रबंधन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा दिया जाता है।
पहली चुनौती पार्टी के विलय की
पवार परिवार की अब तक मौन रहीं सदस्य को अब भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ काम करते हुए एनसीपी को एकजुट रखने और गठबंधन की गतिशीलता पर बातचीत करने की कठिन चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन उनकी तात्कालिक चुनौती यह तय करना होगा कि एनसीपी के दोनों गुटों के बहुप्रतीक्षित विलय को आगे बढ़ाया जाए या नहीं।

