रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों की सबसे खराब चाल, पांच साल में पहली बार भारी बिकवाली के दबाव में
मुंबई- भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में कल एक फीसदी से ज्यादा तेजी आई है। लेकिन इस साल यह 10 फीसदी से अधिक गिर चुका है। इस कारण इसके मार्केट कैप में करीब 29 अरब डॉलर की गिरावट आई है। कंपनी का शेयर पिछले 5 साल में सबसे ज्यादा बिकवाली के स्तर पर पहुंच गया है।
रिलायंस ने पिछले शुक्रवार को दिसंबर तिमाही के नतीजे घोषित किए थे। लेकिन तिमाही के नतीजों ने भी शेयर की कीमत को बढ़ाने में मदद नहीं की। मंगलवार को रिलायंस कंपनी के शेयर का 14-दिन का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 24 पर आ गया, जो एक महत्वपूर्ण मोमेंटम इंडिकेटर है। RSI का यह स्तर पिछले पांच साल में कभी नहीं देखा गया, जो यह बताता है कि शेयर बहुत ज्यादा बिक चुके हैं। रिलायंस के शेयर 2011 के बाद से साल की सबसे खराब शुरुआत की ओर बढ़ रहे हैं।
तीसरी तिमाही के नतीजों के बाद ज्यादातर विश्लेषकों ने स्टॉक पर अपने अनुमानों में 1-3% की कटौती की है। यह कटौती मुख्य रूप से रिटेल सेगमेंट में आई कमजोरी के कारण हुई है। 28 ब्रोकरेज फर्मों की इस स्टॉक पर नजर है। उनमें से ज्यादातर का मानना है कि शेयर की कीमत मौजूदा बाजार भाव से 23% तक बढ़ सकती है। इन फर्मों ने शेयर का एवरेज टारगेट प्राइस 1,717 रुपये रखा है। कम से कम 11 विश्लेषकों ने 1,750 रुपये या उससे अधिक का टारगेट प्राइस दिया है। इनमें से 7 ब्रोकरेज फर्मों ने तो 1,800 रुपये या उससे अधिक का लक्ष्य रखा है।
कुल 28 ब्रोकरेज फर्मों में से 26 ने ‘बाय’ या ‘ऐड’ की सलाह दी है। रिटेल सेगमेंट के कमजोर प्रदर्शन के पीछे क्विक कॉमर्स के विस्तार, फैशन और लाइफस्टाइल सेगमेंट में आई सुस्ती और नए लेबर कोड का असर बताया जा रहा है। विश्लेषकों ने यह भी कहा है कि चौथी तिमाही में रिटेल के लिए पिछला बेस काफी ऊंचा है, इसलिए आने वाले समय में ग्रोथ के आंकड़े मामूली रहने की उम्मीद है। विश्लेषकों ने आने वाले समय के लिए कुछ खास बातों पर ध्यान दिलाया है, जिनमें जियो की लिस्टिंग, टैरिफ में बढ़ोतरी, नए एनर्जी इकोसिस्टम का तेजी से बढ़ना और रिटेल ग्रोथ में सुधार शामिल हैं।

