दशकों के घाटे से बाहर निकलीं डिस्कॉम, 25,533 करोड़ के नुकसान के बाद 2,701 करोड़ का शुद्ध मुनाफा

मुंबई-देश की विद्युत वितरण कंपनियां कई वर्षों के घाटे के बाद फिर से मुनाफे में आ गई हैं। 2024-25 में इन कंपनियों ने सामूहिक रूप से 2,701 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया है। 2023-24 में 25,553 करोड़ और 2013-14 में 67,962 करोड़ रुपये का घाटा इन कंपनियों को हुआ था।

विद्युत मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया कि यह इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। राज्य विद्युत बोर्डों के विभाजन और निगमीकरण के बाद से पिछले कई वर्षों से वितरण कंपनियां समग्र रूप से घाटे में चल रही थी। इस उपलब्धि पर केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि यह वितरण क्षेत्र के लिए एक नया अध्याय है और वितरण क्षेत्र की चिंताओं को दूर करने के लिए किए गए कई प्रयासों का परिणाम है।

विद्युत मंत्रालय ने एक दशक में वितरण इकाइयों के प्रदर्शन में सुधार लाने के लिए ठोस प्रयास किए हैं। विभिन्न नीतिगत पहलों के अलावा, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ व्यापक संवादों में वितरण क्षेत्र में सुधारों पर जोर दिया गया है। इनमें 2025 में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के ऊर्जा मंत्रियों के क्षेत्रीय सम्मेलनों में हुई चर्चाएं शामिल हैं। बिजली (विलंबित भुगतान अधिभार) नियमों जैसे सुधारों के परिणामस्वरूप बिजली उत्पादन कंपनियों के बकाया भुगतान में 96 प्रतिशत की कमी आई है जो 2022 में 1,39,947 करोड़ रुपये से घटकर जनवरी 2026 तक मात्र 4,927 करोड़ रुपये रह गया है। साथ ही वितरण कंपनियों के भुगतान चक्र में भी 2020-21 के 178 दिनों से घटकर 2024-25 में 113 दिन रह गए हैं।

मंत्रालय ने कहा कि सुधारों का परिणाम न केवल वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के इतने वर्षों बाद दर्ज किए गए शुद्ध मुनाफे में स्पष्ट है, बल्कि अन्य प्रदर्शन संकेतकों में भी दिखाई देता है। पिछले कुछ वर्षों में कुल तकनीकी एवं वाणिज्यिक (एटीएंडसी) घाटे में कमी आई है, जो एक परिवर्तन का संकेत है।एटीएंडसी घाटा वित्त वर्ष 2013-14 में 22.62 प्रतिशत से घटकर 2024-25 में 15.04 प्रतिशत हो गया है।

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