उपभोक्ता मंत्रालय के हेल्पलाइन से ग्राहकों को 9 माह में 52 करोड़ रुपये मिला रिफंड
मुंबई- उपभोक्ता मामलों के विभाग की सक्रियता से इसके हेल्पलाइन पर आई शिकायतों का तेजी से समाधान हो रहा है। पिछले 9 महीनों यानी 25 अप्रैल से लेकर 31 जनवरी तक कुल 79,521 शिकायतों का समाधान किया गया है। इससे ग्राहकों को 52 करोड़ रुपये की राशि लौटाने में मदद मिली है।
उपभोक्ता मामलों के विभाग की सचिव निधि खरे ने बताया, इस दौरान कुल 31 क्षेत्रों में उपभोक्ताओं की शिकायतें मिलीं थीं। इनमें शीर्ष पांच में ई-कॉमर्स, यात्रा और पर्यटन, एजेंसी सेवाएं, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद और सामान्य बीमा क्षेत्र थे। ई-कॉमर्स क्षेत्र में सबसे अधिक 47,743 शिकायतें दर्ज की गईं। इसमें ग्राहकों को 36 करोड़ रुपये से अधिक की वापसी की सुविधा प्रदान की गई। इसके बाद यात्रा और पर्यटन क्षेत्र का स्थान रहा, जहां ग्राहकों को 4 करोड़ से अधिक की वापसी की सुविधा प्रदान की गई।
एजेंसी सेवाओं से संबंधित कुल 1,103 शिकायतों का निपटान किया गया और 1.53 करोड़ रुपये की रकम उपभोक्ताओं को वापस दिलाई गई। इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के मामले में 788 शिकायतों के निपटान के तहत 1.45 करोड़ रुपये की रकम वापस दिलाई गई। सामान्य बीमा कंपनियों के खिलाफ 293 शिकायतों के तहत 1.18 करोड़ रुपये वापस दिलाए गए।
ई-कॉमर्स क्षेत्र में रिफंड से संबंधित शिकायतें पूरे देश से प्राप्त हुईं, जिनमें महानगरों के साथ-साथ दूरस्थ और कम आबादी वाले क्षेत्र भी शामिल थे। एक उपभोक्ता ने एक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से एक वस्तु खरीदी। हालांकि, कंपनी ने डिलीवरी की तारीख बार-बार बदली और भुगतान वापस नहीं किया। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के समय पर हस्तक्षेप से कंपनी ने तुरंत रिफंड की प्रक्रिया पूरी कर दी।
एक उपभोक्ता को अपने वाहन में डायग्नोस्टिक संबंधी समस्या का सामना करना पड़ा। बार-बार अनुरोध करने के बावजूद कंपनी समस्या का समाधान करने में विफल रही। एनसीएच के हस्तक्षेप से मामले का तुरंत समाधान किया गया और उपभोक्ता को पूरी राशि वापस कर दी गई। एक ग्राहक ने ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप के माध्यम से खाना ऑर्डर किया, लेकिन उसे गलत सामान और कम मात्रा में सामान मिला। बार-बार अनुरोध करने के बावजूद, कंपनी ने कोई जवाब नहीं दिया।
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) मुकदमेबाजी से पहले के चरण में प्रभावी, समय पर और सुलभ उपभोक्ता शिकायत निवारण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उपभोक्ता आयोगों के समक्ष औपचारिक न्यायनिर्णय का सहारा लिए बिना विवादों का समाधान करके, हेल्पलाइन उपभोक्ता मंचों पर बोझ को काफी कम करती है और उपभोक्ताओं के लिए त्वरित और सौहार्दपूर्ण समाधान सुनिश्चित करती है।

