छोटे कारोबारों के लिए महिलाओं की कर्ज हिस्सेदारी में तेज उछाल, पांच साल में दोगुनी हुई संख्या

मुंबई- महिलाएं अब छोटे कारोबारों के लिए ज्यादा कर्ज ले रही हैं। 5 साल में संख्या दोगुनी हो गई है। रिटेल लोन लेने वाली महिलाएं 2.14 गुना और छोटे व मझोले कारोबार (एमएसएमई) के लिए कर्ज लेने वाली 2.62 गुना बढ़ी है। स्टैंडअप इंडिया स्कीम में महिलाओं की हिस्सेदारी 82% है।

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया कि महिलाओं के छोटे कारोबारों पर मुद्रा योजना का असर जानने के लिए दो अलग-अलग अध्ययन कराए गए हैं। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के 2018 के राष्ट्रीय सर्वे के अनुसार, 2015 से 2018 के बीच मुद्रा योजना से करीब 1.12 करोड़ अतिरिक्त रोजगार पैदा हुए।

उत्तर और पूर्वी भारत के राज्यों में मांग ज्यादा है। बिहार में 4.98 करोड़ खाते हैं जबकि तमिलनाडु में  3.88 करोड़ और  उत्तर प्रदेश में  3.57 करोड़ खाते हैं। प. बंगाल में 3.54 करोड़ खाते, महाराष्ट्र में 3.50 करोड़ खाते हैं।  सरकारी योजनाओं में अब 80% तक शेयर हो गया है। इसमें जीवन ज्योति बीमा में 54% और सुरक्षा बीमा में 51% हिस्सा है।  बिजनेस लोन में 9 फीसदी से बढ़कर 16 फीसदी: महिलाएं अब केवल व्यक्तिगत जरूरतों तक सीमित नहीं हैं। बिजनेस लोन के क्षेत्र में हिस्सेदारी 9 फीसदी (2019) से बढ़कर अब 16 फीसदी (दिसंबर 2024) हो गई है।  महिलाएं लोन लेने से पहले वित्तीय प्रोफाइल को बेहतर बनाने पर ध्यान दे रही हैं, ताकि आसान शर्तों पर कर्ज मिल सके। महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, यूपी और तेलंगाना जैसे राज्यों ने महिलाओं में क्रेडिट सशक्तीकरण को बहुत तेजी से अपनाया है।

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