सेबी बोर्ड की बैठक आज : म्यूचुअल फंड और स्टॉक ब्रोकरों के नियमों की होगी समीक्षा

मुंबई। पूंजी बाजार नियामक सेबी शेयर और म्यूचुअल फंड हाउस के ब्रोकरों के नियमों की समीक्षा करेगा। साथ ही, अनिवासी भारतीयों के लिए केवाईसी जरूरतों में ढील देने और क्लोजिंग ऑक्शन सत्र भी शुरू करने पर चर्चा होगी। बोर्ड की बुधवार को बैठक होगी। इसमें नियामक के चेयरमैन सहित उच्च अधिकारियों की संपत्तियों को सार्वजनिक करने पर भी विचार किया जाएगा।

सेबी बोर्ड एक उच्च स्तरीय पैनल की रिपोर्ट पर विचार करेगा, जिसमें हितों के टकराव से बचने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की संपत्तियों के सार्वजनिक खुलासे की सिफारिश की गई है। यह सेबी प्रमुख तुहिन कांत पांडे की अध्यक्षता में होने वाली बोर्ड की चौथी बैठक होगी। बैठक में नियामक पैनल की रिपोर्ट पर चर्चा होगी। इसमें सेबी के शीर्ष अधिकारियों के हितों के टकराव को दूर करने के लिए अधिक खुलासे के माध्यम से पारदर्शिता लाने के लिए बड़े सुधारों का प्रस्ताव है। पैनल ने 10 नवंबर को पांडे को रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में सुरक्षित और गुमनाम व्हिसलब्लोअर प्रणाली स्थापित करने, महंगे उपहारों पर प्रतिबंध लगाने, सेवानिवृत्ति के बाद दो साल के लिए कार्यभार सौंपने पर रोक लगाने और मुख्य आचार एवं अनुपालन अधिकारी का पद सृजित करने की भी सिफारिश है।

म्यूचुअल फंड और स्टॉक ब्रोकर के नियमों के संबंध में पहले ही विनियमों पर परामर्श पत्र जारी किए गए थे। अक्तूबर में नियामक ने म्यूचुअल फंड नियमों में संशोधन का प्रस्ताव कर एक परामर्श पत्र जारी किया था। इसमें कुल खर्च अनुपात (टीईआर) की स्पष्ट परिभाषा और ब्रोकरेज शुल्कों पर संशोधित सीमाएं शामिल हैं। इनका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना, जानकारी को व्यवस्थित करना, गैर जरूरतों को कम करना और अनुपालन को आसान बनाना है।

0.05 फीसदी अतिरिक्त खर्च को हटाने की योजना

प्रस्तावित ढांचे के तहत सेबी ने परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी) की ओर से म्यूचुअल फंड योजनाओं पर लगने वाले अतिरिक्त खर्च 0.05 फीसदी को हटाने की योजना बनाई है। इसे पहली बार 2012 में 0.20 फीसदी तय किया गया था। 2018 में घटाकर 0.05 फीसदी कर दिया गया था। सेबी ने सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स, वस्तु एवं सेवा कर, कमोडिटी ट्रांजैक्शन टैक्स और स्टांप ड्यूटी जैसे सभी वैधानिक करों को टीईआर सीमा से बाहर रखने का सुझाव दिया है। साथ ही ब्रोकरेज, एक्सचेंज और नियामक शुल्कों के लिए वर्तमान में मंजूर खर्चों को भी इसमें शामिल करने की बात कही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *