कच्चा तेल सस्ता, फिर भी पेट्रोल-डीजल महंगा; तेल कंपनियों ने तिमाही में कमाए 23,743 करोड़ रुपये
मुंबई- वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय से 65 से 70 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास स्थिर हैं। इस दौरान घरेलू तेल कंपनियों ने ग्राहकों को महंगा पेट्रोल और डीजल बेचकर भारी मुनाफा कमाया है। तीन प्रमुख सरकारी कंपनियों को दिसंबर तिमाही में 23,743 करोड़ का फायदा हुआ है जो एक साल पहले की समान अवधि के 10,545 करोड़ रुपये की तुलना में दोगुना से भी ज्यादा है।
आंकड़े बताते हैं कि तेल कंपनियों के मुनाफे में यह भारी वृद्धि मजबूत रिफाइनिंग मार्जिन और एलपीजी की कम अंडर रिकवरी के कारण हुई है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) का ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (जीआरएम) तीसरी तिमाही में चार गुना बढ़ गया। भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) का जीआरएम दो गुना से अधिक हो गया। यह वृद्धि कच्चे तेल की नरम कीमतों और उत्पाद क्रैक में मजबूती के कारण हुई।
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के आंकड़ों के अनुसार, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) का जीआरएम पिछले वर्ष की इसी अवधि के 3 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 12.2 डॉलर प्रति बैरल हो गया। बीपीसीएल का जीआरएम 5.6 डॉलर से बढ़कर 13.3 डॉलर हो गया। एचपीसीएल का जीआरएम 6 डॉलर से बढ़कर 8.9 डॉलर हो गया।
डीजल, पेट्रोल और विमानन टरबाइन ईंधन पर क्रैक स्प्रेड (कच्चे तेल की कीमत और उसके रिफाइनिंग उत्पादों की कीमत के बीच का अंतर) में पिछले वर्ष की तुलना में सुधार हुआ है। दिसंबर तिमाही में बेंचमार्क सिंगापुर जीआरएम बढ़कर 6.2 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 4.9 डॉलर प्रति बैरल था।
हालांकि, पंप की कीमतें अपरिवर्तित रहने के कारण तीनों सरकारी रिफाइनरियों के मार्केटिंग मार्जिन में गिरावट आई। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर तिमाही में पेट्रोल पर खुदरा मार्जिन 7.8 रुपये प्रति लीटर रहा, जो एक साल पहले के 12 रुपये प्रति लीटर से कम है। डीजल पर खुदरा मार्जिन 2.9 रुपये प्रति लीटर रहा, जो पहले के 8 रुपये से कम है।
दिसंबर तिमाही में आईओसी ने 12,126 करोड़ का लाभ दर्ज किया। बीपीसीएल और एचपीसीएल ने क्रमशः 7,545 करोड़ और 4,072 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया। दिसंबर तिमाही में सरकार ने खाना पकाने की गैस को बाजार दर से कम दामों पर बेचने के लिए तेल विपणन कंपनियों को वादा किया गया मुआवजा देना शुरू कर दिया है। मुआवजे की प्राप्ति के साथ-साथ तिमाही के दौरान एलपीजी की कम कीमतों ने भी कंपनियों की कमाई में मदद की।
देश में इस समय एक लाख से ज्यादा पेट्रोल पंप हैं। इसमें से 90 फीसदी हिस्सा तीनों सरकारी कंपनियों का है। बाकी नायरा और रिलायंस के पास हैं।

