आईसीआईसीआई बैंक घोटाला, संदीप बख्शी के खिलाफ जारी हुआ गैर जमानती वारंट

मुंबई- आईसीआईसीआई बैंक घोटाले का मामला चंदा कोचर के बाद थमा नहीं। चंदा कोचर के बाद बैंक के नए एमडी चुने गए संदीप बख्शी को भी कुछ मामलों में कोर्ट का सामना करना पड़ा। इस समय संदीप बख्सी को दो साल के लिए सेवा विस्तार मिला है जो अक्तूबर 2028 तक लागू है।

13 सितंबर, 2019 को उदयपुर की एक अदालत ने ICICI बैंक के सीईओ संदीप बख्शी के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया। यह वारंट उनके ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस में कार्यकाल के दौरान की एक शिकायत से संबंधित था। वारंट में पूर्व कर्मचारी द्वारा लगाए गए कथित धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और मानहानि के आरोपों का जिक्र था।

आरोप: इस मामले में बीमा पॉलिसियों की गलत बिक्री का खुलासा करने वाले एक व्हिसलब्लोअर के खिलाफ झूठी आपराधिक शिकायत दर्ज करने का आरोप था।

अदालती कार्रवाई: अदालत ने आरोपों का संज्ञान लेते हुए बख्शी और अन्य अधिकारियों को 8 नवंबर, 2019 को पेश होने के लिए वारंट जारी किया। यह उनके करियर का एक अलग, पूर्व का मामला था और इसमें ICICI बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ के रूप में उनकी वर्तमान भूमिका शामिल नहीं थी।

जनवरी 2026 में, ICICI बैंक के निदेशक मंडल ने संदीप बख्शी को प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के रूप में दो साल के अतिरिक्त कार्यकाल के लिए पुनः नियुक्त करने की मंजूरी दी, जो 4 अक्टूबर, 2026 से 3 अक्टूबर, 2028 तक बढ़ा दिया गया है। वे अक्टूबर 2018 से बैंक का नेतृत्व कर रहे हैं और इस दौरान उन्होंने महत्वपूर्ण परिवर्तन, शेयर मूल्य में वृद्धि और परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार किया है।

चंदा कोचर के इस्तीफे के बाद, संदीप बख्शी को पहली बार 15 अक्टूबर, 2018 को ICICI बैंक के प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्हें शुरू में पांच साल के कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया था और बाद में उनकी नियुक्ति को पुनः बढ़ाया गया, जिसका कार्यकाल हाल ही में 2028 तक बढ़ा दिया गया है।

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