अमेरिकी टैरिफ में कटौती से भारतीय चमड़ा और फुटवियर उद्योग को बड़ी राहत
मुंबई- भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ घटाकर 18 फीसदी करने के अमेरिकी फैसले से भारत के चमड़ा और जूता उद्योग को राहत मिली है। यह उद्योग निर्यात वृद्धि के लिए अमेरिकी बाजार पर काफी हद तक निर्भर है। इस कदम से कीमतों में प्रतिस्पर्धात्मकता बहाल होने और ऑर्डर में स्थिरता आने की उम्मीद है।
भारतीय निर्यातकों को टैरिफ में 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी का सामना करना पड़ रहा था। इसके चलते कई निर्यातकों को अमेरिकी खरीदारों को बनाए रखने के लिए 10-40 फीसदी तक की भारी छूट देनी पड़ रही थी। इन रियायतों के बावजूद, अमेरिका को निर्यात में लगभग 25 फीसदी की गिरावट आई और ऑर्डर तेजी से वियतनाम, कंबोडिया, इंडोनेशिया और फिलीपीन जैसे प्रतिस्पर्धी विनिर्माण केंद्रों की ओर जा रहे थे।
तमिलनाडु के अंबूर में तनाव विशेष रूप से ज्यादा रहा है, जो चमड़ा उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र है। यहां कई कंपनियों का लगभग 60 फीसदी हिस्सा अमेरिकी बाजार में है। इस क्षेत्र के निर्यातकों का कहना है कि टैरिफ को लेकर लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता ने ऑर्डर की स्पष्टता को बाधित किया है और क्षमता उपयोग और रोजगार को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। अमेरिका भारत से चमड़े और चमड़े के उत्पादों का सबसे बड़ा आयातक था और चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-जून में देश के कुल चमड़ा निर्यात का 21.56 फीसदी हिस्सा था।
चमड़ा उत्पादन में भारत का हिस्सा 13 फीसदी
भारत वैश्विक चमड़ा उत्पादन का लगभग 13 फीसदी हिस्सा रखता है। चमड़े के वस्त्रों का विश्व का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है। यह चमड़े के सामान और सहायक वस्तुओं का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक भी है। चालू वित्त वर्ष में अमेरिका को चमड़े का निर्यात 85 से 90 करोड़ डॉलर होने का अनुमान है। इसमें जूते, तैयार चमड़ा, सहायक वस्तुएं और परिधान शामिल हैं। हालांकि, टैरिफ में वृद्धि ने कुछ भारतीय चमड़े के उत्पादों पर कुल शुल्क को 40-50% तक बढ़ा दिया। इससे वियतनाम, कंबोडिया और इटली जैसे प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले मूल्य प्रतिस्पर्धा में भारी गिरावट आई है।
जूते-चप्पलों का निर्यात स्थिर
भारत के जूते-चप्पलों का निर्यात पिछले नौ वित्त वर्षों में स्थिर रहा है। औसतन प्रति वर्ष 25-26 करोड़ जोड़ी रहा है। 2022-23 में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद 2024-25 में वृद्धि दर धीमी होकर लगभग तीन फीसदी रह गई। इसका मुख्य कारण आर्थिक अनिश्चितता और मुद्रास्फीति के दबाव के बीच अमेरिका और यूरोप जैसे प्रमुख बाजारों में उपभोक्ता मांग में कमी आना था। इस चिंता का असर भारत के तेजी से बढ़ते गैर-चमड़े के जूते-चप्पल बाजार पर भी पड़ा है। तमिलनाडु प्रमुख वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरा है और नाइकी, प्यूमा, क्रॉक्स और एडिडास जैसे ब्रांडों से कई हजार करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित कर चुका है। अमेरिका के उच्च शुल्कों की आशंका से यह चिंतित है।

