बजट 2026: आम लोगों को क्या मिलेगा सस्ता और किन चीजों से बढ़ेगा खर्च? पूरी सूची यहां देखें
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करते हुए आम उपभोक्ताओं और उद्योग जगत—दोनों को ध्यान में रखकर कई बड़े फैसले किए हैं। सरकार ने कस्टम ड्यूटी में व्यापक कटौती और कुछ मामलों में कर ढांचे में बदलाव कर घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी कई वस्तुओं को सस्ता करने का संकेत दिया है।
इन घोषणाओं का सीधा असर समुद्री उत्पादों से लेकर जूते-चमड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन, ऊर्जा, दवाइयों और अंतरराष्ट्रीय यात्रा तक पर पड़ेगा। जहां कई सेक्टरों में लागत घटने से ग्राहकों को राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं कुछ आयातित वस्तुओं और सेवाओं में कर बदलाव से खर्च बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। यहां आसान भाषा में समझिए कि बजट 2026 के बाद किन चीजों के दाम घट सकते हैं और किन मामलों में आपकी जेब पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
किन चीजों के सस्ते होने की उम्मीद
- समुद्री उत्पाद और मछली पालन
सरकार ने समुद्री खाद्य उत्पादों की प्रोसेसिंग के लिए आयात सीमा में वृद्धि की है। इससे मछली पालन उद्योग से जुड़े उद्यमों को कच्चा माल आसानी से उपलब्ध होगा और प्रोसेसिंग लागत घटेगी। इसका फायदा उपभोक्ताओं तक सस्ते समुद्री उत्पादों के रूप में पहुंच सकता है।
- जूते और चमड़ा उद्योग
जूते के ऊपरी हिस्सों के निर्यात के लिए शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी गई है। इससे फुटवियर मैन्युफैक्चरिंग की लागत घटेगी और घरेलू बाजार में जूते अपेक्षाकृत सस्ते हो सकते हैं।
इसके अलावा, चमड़े और वस्त्र परिधानों के कच्चे माल पर दी गई आयात छूट की समयसीमा को एक साल के लिए बढ़ाया गया है, जिससे इस उद्योग को स्थिरता मिलने की उम्मीद है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स और लिथियम आधारित उत्पाद
लिथियम-आयन बैटरियों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कई इनपुट्स पर सीमा शुल्क में छूट दी गई है। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरी स्टोरेज सिस्टम की लागत कम हो सकती है।
माइक्रोवेव ओवन और अन्य घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के कुछ पुर्जों पर कस्टम ड्यूटी घटाने का फैसला भी उपभोक्ताओं के लिए राहतभरा माना जा रहा है।
- औद्योगिक इनपुट और महत्वपूर्ण खनिज
सेमीकंडक्टर निर्माण और अन्य रणनीतिक खनिजों की प्रोसेसिंग में उपयोग होने वाली सामग्रियों पर आयात शुल्क में छूट दी गई है। इससे घरेलू उत्पादन को बल मिलेगा और लंबे समय में इलेक्ट्रॉनिक व औद्योगिक उत्पादों की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
- ऊर्जा और बायोगैस आधारित ईंधन
बायोगैस मिश्रित सीएनजी पर शुल्क में छूट देने से वैकल्पिक ईंधन सस्ता हो सकता है। इससे न केवल उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी बल्कि हरित ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और उत्पादन को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
- रक्षा और विमानन सेक्टर
एयरक्राफ्ट के पुर्जों और रक्षा उपकरणों के कुछ कंपोनेंट्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी में कटौती की गई है। इससे भारत में विमान और रक्षा उपकरणों के निर्माण की लागत घट सकती है, जिसका अप्रत्यक्ष फायदा अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन पर भी पड़ेगा।
- स्वास्थ्य और विदेश से जुड़े खर्च
कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों की दवाओं पर कस्टम ड्यूटी में छूट देने का फैसला मरीजों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
साथ ही, विदेशी टूर पैकेज पर टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है। विदेश में पढ़ाई या इलाज के लिए पैसा भेजने पर लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत भी TCS को 2 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे छात्रों, मरीजों और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को राहत मिलेगी।
किन मामलों में बढ़ सकता है खर्च
हालांकि बजट में कई वस्तुओं पर कर राहत दी गई है, लेकिन कुछ आयातित उत्पादों और सेवाओं पर कर ढांचे में बदलाव से कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। सरकार का कहना है कि यह कदम घरेलू उद्योगों को संरक्षण देने और राजस्व संतुलन बनाए रखने के लिए उठाए गए हैं। इन वस्तुओं की विस्तृत सूची अधिसूचनाओं के जरिए अलग से जारी की जाएगी।

