एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट, चांदी 72,500 रुपये गिरकर 3.12 लाख रुपये पर
मुंबई- सोने और चांदी की कीमतों में लगातार तेजी अब गिरावट में बदल गई है। इससे भारी फायदे के लिए खरीदने वाले निवेशकों को दो दिन में ही भारी चपत लग चुकी है। शनिवार को दिल्ली सराफा बाजार में चांदी की कीमतें एक दिन में रिकॉर्ड करीब 19 फीसदी या 72,500 रुपये टूटकर 3.12 लाख रुपये प्रति किलो के भाव पर आ गई। इसी के साथ सोना भी दो फीसदी या 3,500 रुपये सस्ता होकर 1,65,500 रुपये प्रति दस ग्राम पर आ गया है।
निवेशकों ने मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण वैश्विक स्तर पर हुई बिकवाली के चलते मुनाफावसूली की। ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन के अनुसार, चांदी में लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट दर्ज की गई। इससे इस सप्ताह की रिकॉर्ड बढ़त का अधिकांश हिस्सा खत्म हो गया। शुक्रवार को यह सफेद धातु 20,000 रुपये या पांच फीसदी सस्ती हुई थी। इससे पहले बृहस्पतिवार को यह रिकॉर्ड 4,04,500 रुपये के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई थी।
चांदी की कीमत 31 दिसंबर, 2025 को 2,39,000 रुपये प्रति किलोग्राम थी। एक महीने से कम समय में इसमें 1.65 लाख रुपये की तेजी आई थी। हालांकि, दो दिनों में इसमें 92,000 रुपये से ज्यादा की गिरावट आई है जिससे यह बढ़त अब आधी से भी कम रह गई है। सोना बृहस्पतिवार को महंगा होकर 1,83,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। इसमें भी दो दिनों में करीब 17,000 रुपये की गिरावट आई है। जनवरी में इसमें 45,300 रुपये या करीब 33 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। 31 दिसंबर को 1,37,700 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।
ट्रंप के फैसले का असर
विश्लेषकों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा फेडरल रिजर्व के पूर्व गवर्नर और मजबूत डॉलर के जाने-माने समर्थक केविन वॉर्श को अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व का प्रमुख नामित करने के बाद डॉलर सूचकांक 0.9 प्रतिशत बढ़कर 97.15 पर बंद हुआ। इससे सुरक्षित निवेश के रूप में मानी जाने वाली संपत्तियों के आकर्षण में कमी आई।
…तो 60 डॉलर तक जा सकता है चांदी का भाव
विश्लेषकों ने कहा, चांदी की कीमत में और गिरावट आ सकती है, लेकिन यह 60 डॉलर प्रति औंस के आसपास स्थिर हो सकती है। सोने की कीमत मध्यम अवधि में बढ़कर 6,000 डॉलर और उसके बाद अगले दो वर्षों में 8,000 डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। ऊंची कीमतों ने चांदी के भौतिक मांग पर दबाव डालना शुरू कर दिया है। खासकर भारत जैसे मूल्य-संवेदनशील बाजारों में। िससे संकेत मिलता है कि सोने के लिए व्यापक तेजी का दृष्टिकोण बरकरार रहने के बावजूद निकट भविष्य में अस्थिरता बनी रह सकती है।

