डिजिटलीकरण के बावजूद बीमा उत्पादों पर भारी कमीशन से पॉलिसीधारकों को नुकसान
मुंबई-बीमा उत्पादों पर वितरकों को मिलने वाले भारी कमीशन पर सरकार ने चिंता जताई है। आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने के बावजूद बीमा की लागत लगातार बढ़ी है। पॉलिसीधारकों के प्रीमियम का एक बड़ा हिस्सा वितरकों को कमीशन के रूप में मिल रहा है। इसमें लागत को आसान बनाने और पॉलिसीधारक को पैसे का सही मूल्य दिलाने के लिए डिजिटलीकरण को प्राथमिकता देने की जरूरत पर बल दिया गया है।
सर्वे के मुताबिक, उच्च लागत के कारण बीमा की पहुंच नहीं बढ़ पा रही है। इसका सीधा असर बीमा कारोबार की पहुंच को बढ़ाने पर दिख रहा है। बीमा पैठ में ठहराव को उजागर किया। इसमें कहा गया है, 2024-25 में बीमा घनत्व बढ़कर 97 डॉलर हो गया है। यह वित्तीय प्रणाली में पहले से एकीकृत परिवारों के अधिक खर्च को दर्शाता है, लेकिन बीमा पैठ में ठहराव और गिरावट आई है। इससे संकेत मिलता है कि यह क्षेत्र मौजूदा ग्राहकों से राजस्व बढ़ाने में सफल रहा है, लेकिन उच्च वितरण लागत जोखिम पूल के विस्तार को रोक रही है।
सर्वेक्षण में कहा गया है कि कठोर लागत संरचना का मतलब है कि प्रीमियम वृद्धि नॉमिनल जीडीपी के साथ तालमेल नहीं रख पा रही है। इससे क्षेत्र का आर्थिक आकार कम हो रहा है। बीमा क्षेत्र में सुधार के लिए कुल लागत और वितरण खर्च को कम करना जरूरी है। कुल लागत और वितरण खर्चों को कम करना सामर्थ्य में सुधार लाने, मध्य वर्ग तक पहुंच बनाने और बीमा पैठ में गिरावट को रोकने के लिए आवश्यक है। बढ़ती लागत केवल एक परिचालन संबंधी बाधा नहीं है, यह क्षेत्र के विकास पर एक संरचनात्मक अवरोध के रूप में कार्य करती है। इससे समावेशन को सीमित करने, उपभोक्ता मूल्य को कम करने और दीर्घकालिक स्थिरता को खतरे में डालने वाली विकृतियां उत्पन्न होती हैं।
सर्वे के अनुसार, वास्तव में, उच्च लागत वाला मॉडल बीमा कंपनियोंकी मूल वित्तीय मजबूती के लिए जोखिम पैदा करता है। निजी जीवन बीमा कंपनियों ने मजबूत राजस्व वृद्धि के बावजूद कमीशन में वृद्धि के कारण मार्जिन में कमी आने से शुद्ध लाभ में ठहराव देखा है। अधिग्रहण लागतों को युक्तिसंगत बनाने से बीमाकर्ता जोखिम का अधिक सटीक मूल्यांकन कर सकेंगे और ग्राहक मूल्य बढ़ा सकेंगे। इससे उत्पाद और कीमतें अधिक सस्ती हो जाएंगी। यदि उद्योग इन लागत संबंधी समस्याओं को दूर कर लेता है, तो यह न केवल पैठ घनत्व विरोधाभास को हल करेगा, बल्कि बचत के एक सीमित संकलक से अर्थव्यवस्था के एक सही मायने में समावेशी और लचीले स्तंभ में भी परिवर्तित हो जाएगा।

