महंगाई से बहुत गहरा नाता है बीमा का, जानिए क्यों है यह जरूरी 

मुंबई- कहीं आप भी उन लोगों में तो शामिल नहीं, जो सोचते हैं कि भला महंगाई का इंश्योरेंस से क्या लेना-देना? या आपको लगता है कि लोग महंगाई की कुछ ज्यादा ही फिक्र करते हैं। अगर ऐसा है तो आपको अपनी इस सोच पर फिर से विचार करना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि महंगाई का आपके इंश्योरेंस पर काफी गहरा असर पड़ सकता है। आपकी पहले से खरीदी हुई बीमा पॉलिसी पर भी और आपके परिवार के भविष्य की आर्थिक सुरक्षा पर भी।  

अगर आपने बढ़ती महंगाई का ध्यान नहीं रखा तो बीमा पॉलिसी खरीदने के बाद भी आप अपने परिवार के भविष्य को पूरी तरह आर्थिक संकट से दूर नहीं रख पाएंगे। इंश्योरेंस पॉलिसी हमेशा लंबे अरसे की संभावित जरूरत और सुरक्षा को ध्यान में रखकर ली जाती है। लेकिन महंगाई के कारण रुपये का वास्तविक मूल्य घट जाता है। इसका सीधा असर आपकी बीमा राशि यानी सम एश्योर्ड के वास्तविक मूल्य पर भी पड़ता है।  

मिसाल के तौर पर टर्म प्लान लेने के लिए आम तौर पर यह नियम बताया जाता है कि आपको अपनी सालाना आमदनी के 10 से 12 गुना के बराबर रकम का टर्म प्लान लेना चाहिए. लेकिन अगर महंगाई की दर लगातार काफी तेजी से बढ़ती रही, तो बीमा कराते वक्त जो रकम आपको अपने परिवार के भविष्य की सुरक्षा के लिए पर्याप्त लग रही थी, वह आने वाले दिनों में बेहद कम साबित हो सकती है। क्योंकि जिन जरूरतों का अनुमान आप आज की कीमतों के आधार पर या महंगाई में धीमी रफ्तार से बढ़ोतरी होने की उम्मीद के आधार पर लगाते हैं, वे कीमतों के तेजी से बढ़ने पर गलत साबित हो सकते हैं। 

यही बात स्वास्थ्य या मेडिल इंश्योरेंस पॉलिसी या किसी अन्य पॉलिसी पर भी लागू होती है। आपको हर साल अपनी खरीदी गई इंश्योरेंस पॉलिसी की समीक्षा करनी चाहिए. इस दौरान आपका ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि क्या आपने कुछ बरस पहले जो पॉलिसी ली थी, वो किसी मुसीबत की हालत में परिवार की बढ़ती आर्थिक जरूरतों और महंगाई के कारण उसमें आ रहे उछाल का बोझ उठाने के लिए काफी है? अगर आपको लगता है कि पॉलिसी की मौजूदा रकम काफी नहीं है, तो आप उसमें टॉप अप प्लान के जरिए या कोई नई पॉलिसी लेकर इजाफा कर सकते हैं। 

बीमा कराते समय परिवार की जिन जरूरतों का सबसे पहले ध्यान आता है, वे हैं घर की मिल्कियत, बच्चों की उच्च-शिक्षा, इलाज पर होने वाले खर्च और रिटायरमेंट के समय पड़ने वाली पैसों की जरूरत। इन सभी बातों पर महंगाई का असर पड़ता है। मिसाल के तौर पर बच्चों की पढ़ाई का खर्च हर साल आपके अनुमान के मुकाबले ज्यादा तेजी से बढ़ सकता है। यही बात इलाज के खर्च के मामले में भी लागू होती है। 

उदाहरण के लिए जिस सर्जरी पर आज 5 लाख रुपये खर्च होते हैं, हो सकता है कुछ बरस बाद उसका खर्च 10 लाख या 20 लाख हो जाए. इन सभी बढ़ते खर्चों को ध्यान में रखते हुए उसी अनुपात में इंश्योरेंस की रकम में इजाफा करना जरूरी है। 

अगर महंगाई के कारण रुपये की क्रय क्षमता में तेजी से गिरावट आ रही है, तो आपको अपने परिवार के लिए जरूरी बीमा कवर का निर्धारण करते समय इसका ध्यान रखना होगा। जिस रफ्तार से रुपये की वास्तविक वैल्यू घट रही है, उसी हिसाब से आपको बीमा राशि की फ्यूचर वैल्यू यानी भविष्य में उसकी संभावित क्रय क्षमता का आकलन करके जरूरी इजाफा करना होगा। यानी अगर रुपये की क्रय क्षमता हर साल 8 फीसदी की रफ्तार से घट रही है, तो आपको भविष्य की जरूरतों का आकलन करते समय अपना निवेश इतना बढ़ाना होगा ताकि महंगाई आपके परिवार की सुरक्षा में सेंध न लगा दे।  

जरूरी नहीं कि अपने परिवार की बढ़ती जरूरतों का आकलन करने के लिए आप किसी प्रचलित नियम यानी थंब रूल का ही सहारा लें. अपने परिवार की वास्तविक जरूरतों का सबसे सही अनुमान आप खुद ही लगा सकते हैं. अगर आपने इन बातों का ध्यान रखा और अपने बीमा कवर में समय-समय पर इजाफा करते रहे, तो आपको जरूरत के वक्त बीमा होते हुए भी आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा. 

Leave a Reply

Your email address will not be published.