डॉलर निर्भरता घटाने की दिशा में कदम: ब्रिक्स देशों की डिजिटल मुद्राओं को जोड़ने का आरबीआई का प्रस्ताव

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ब्रिक्स देशों को डिजिटल मुद्राओं को आपस में जोड़ने का प्रस्ताव दिया है। इससे सीमा पार व्यापार और पर्यटन भुगतान आसान हो सकेगा। साथ ही, देशों में तनाव बढ़ने के साथ अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम हो सकती है। केंद्रीय बैंक ने सरकार को सिफारिश की है कि केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं (सीबीडीसी) को जोड़ने का प्रस्ताव 2026 के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के एजेंडे में शामिल किया जाए। उ

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी भारत करेगा। यह इसी वर्ष के अंत में आयोजित होगा। यदि सिफारिश स्वीकार कर ली जाती है, तो ब्रिक्स सदस्य देशों की डिजिटल मुद्राओं को जोड़ने का प्रस्ताव पहली बार पेश किया जाएगा। ब्रिक्स संगठन में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका सहित अन्य देश शामिल हैं। इस पहल से अमेरिका नाराज हो सकता है, जिसने डॉलर को दरकिनार करने के किसी भी प्रयास के खिलाफ चेतावनी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले भी ब्रिक्स गठबंधन को अमेरिका विरोधी बताया था और इसके सदस्यों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी थी।

आरबीआई का प्रस्ताव रियो डी जनेरियो में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में 2025 में की गई घोषणा पर आधारित है। आरबीआई ने सीमा पार लेनदेन को गति देने और अपनी मुद्रा के वैश्विक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत के डिजिटल रुपये को अन्य देशों की सीबीडीसी से जोड़ने में सार्वजनिक रूप से दिलचस्पी दिखाई है। हालांकि, उसने कहा है कि रुपये के वैश्विक उपयोग को बढ़ावा देने के उसके प्रयास डॉलर-विरोधी प्रभाव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नहीं हैं।

हालांकि ब्रिक्स के किसी भी सदस्य देश ने अपनी डिजिटल मुद्राओं को पूरी तरह से लॉन्च नहीं किया है, लेकिन सभी पांच प्रमुख सदस्य देशों ने पायलट परियोजनाएं चलाई हैं। भारत की डिजिटल मुद्रा (ई-रुपया) के दिसंबर, 2022 में लॉन्च होने के बाद से 70 लाख खुदरा यूजर्स हैं।

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