61 फीसदी भारतीय अगले 6 माह में खर्च में करेंगे वृद्धि, आगे अच्छा समय रहने की उम्मीद
मुंबई- देश में उपभोक्ता भावना में पूरे वर्ष मजबूत जीडीपी वृद्धि के कारण स्थिरता बनी हुई है। बोस्टिन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) के अनुसार, 61 प्रतिशत उपभोक्ताओं के लगातार अच्छे समय की उम्मीद के साथ देश सबसे आशावादी बाजारों में से एक बना हुआ है। यह सभी अगले 6 महीने में खर्च में वृद्धि करने की योजना बना रहे हैं। 34 प्रतिशत को व्यापक बेरोजगारी या मंदी की आशंका है, जिसका अर्थ है कि कुल मिलाकर 27 प्रतिशत उपभोक्ता आशावादी हैं।
भारतीय उपभोक्ता देशों के बीच संघर्षों से भी अप्रभावित हैं, क्योंकि केवल 17 फीसदी का मानना है कि हाल के वैश्विक संघर्ष या राजनीतिक घटनाएं देश की वृद्धि को धीमा कर देंगी, जो चीन के बाद दूसरा सबसे कम आंकड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह चीन के बाद दूसरे स्थान पर है और वैश्विक औसत लगभग -12 प्रतिशत से कहीं अधिक है। उपभोक्ताओं के सकारात्मक रुझान को दर्शाते हुए देश में घरेलू खर्च में सभी श्रेणियों में मजबूत वृद्धि होने की उम्मीद है। सभी ट्रैक की गई श्रेणियों में शुद्ध वृद्धि देखी गई है। इसमें ऑटोमोबाइल (70 फीसदी), मोबाइल प्लान और डिवाइस (प्रत्येक 63 फीसदी) सबसे आगे रहे।
विशेष रूप से अधिक खर्च करने की उम्मीद करने वाले एक तिहाई उपभोक्ताओं के लिए यह वृद्धि मुख्य रूप से विवेकाधीन खरीदारी से प्रेरित है जो वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक है। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उभर रहे श्रेणी विशिष्ट व्यवहारों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि ऑटोमोबाइल, मोबाइल उपकरण, मोबाइल प्लान और मकान/अपार्टमेंट किराए जैसी लंबी अवधि वाली और जरूरी श्रेणियों में निकट भविष्य में खर्च करने का रुझान अधिक देखा जा रहा है।
पैक स्नैक्स और कोल्डड्रिंक पर कम हो रहा खर्च
पैकेटबंद स्नैक्स और कोल्डड्रिंक जैसी बार-बार उपभोग की जाने वाली श्रेणियों में खर्च कम हो रहा है। भारत में मिलेनियल्स और जेन एक्स, जेन जेड की तुलना में व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति को लेकर अधिक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उम्र और अनुभव के साथ वर्षों से संचित संपत्ति और बैंक बैलेंस के कारण मिलेनियल्स और जेन एक्स सुरक्षित स्थिति में प्रतीत होते हैं। जेन एक्स का मतलब उनसे है जो 1965 से 1980 के बीच पैदा हुए हैं। 1981 से 1996 के बीच पैदा होने वालों को मिलेनियल्स कहते हैं।
निम्य आय वालों मे वित्तीय सुरक्षा काफी कम
रिपोर्ट में कहा गया है कि उच्च और मध्य आय वर्ग के लोगों में सकारात्मक भावना मजबूत और निरंतर बनी हुई है। लेकिन यह अभी तक निम्न आय वर्ग तक नहीं पहुंची है, जहां वित्तीय सुरक्षा को लेकर उनकी भावना का स्तर काफी कम है। भारत जेन एआई को अपनाने में वैश्विक स्तर पर अग्रणी है। नवंबर, 2025 तक 62 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने खरीदी के लिए जेन एआई का उपयोग किया है। यह फरवरी, 2025 के 48 प्रतिशत से काफी अधिक है।

