पांच साल बाद चीन से उपकरण आयात पर नरमी, बिजली और कोयला परियोजनाओं को राहत

मुंबई- भारत ने 2020 में हुए सीमा संघर्ष के बाद चीनी उपकरणों की खरीद पर लगे प्रतिबंधों में ढील देना शुरू कर दिया है। दो सरकारी अधिकारियों ने बताया कि इससे सरकारी बिजली और कोयला कंपनियों को सीमित आयात शुरू करने की अनुमति मिल गई है, क्योंकि कमी और परियोजनाओं में देरी बढ़ती जा रही है।

पांच साल पुराने प्रतिबंधों में यह पहली महत्वपूर्ण ढील है, जिसने चीनी कंपनियों को भारत के 700 अरब से 750 अरब डॉलर के सरकारी अनुबंध बाजार से लगभग बाहर कर दिया था। सूत्रों ने जनवरी में कहा था कि सीमा पर तनाव कम होने के साथ ही भारत सरकारी अनुबंधों के लिए चीनी बोलीदाताओं को व्यापक छूट देने पर विचार कर रहा है।

2020 के संघर्ष के बाद से भारत ने चीनी बोलीदाताओं के लिए किसी भी सरकारी अनुबंध के लिए प्रतिस्पर्धा करने से पहले एक सरकारी पैनल के साथ पंजीकरण करना और राजनीतिक एवं सुरक्षा मंजूरी प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया है। भारत ने अब सरकारी संस्थाओं को सरकारी मंजूरी के बिना चीन से बिजली ट्रांसमिशन घटक खरीदने की अनुमति दे दी है।

दो अधिकारियों ने बताया, भारत कोयला क्षेत्र के प्रमुख उपकरणों के लिए भी इसी तरह की समयबद्ध छूट पर विचार कर रहा है। यह छूट राष्ट्रीय हित में दी गई है, क्योंकि चीनी आयात पर रोक लगाने से भारत की विनिर्माण क्षमता को नुकसान होगा। शीर्ष नौकरशाहों के एक पैनल ने छूट को मंजूरी दे दी है और जल्द ही एक औपचारिक आदेश जारी होने की उम्मीद है।

दोनों अधिकारियों ने बताया कि यह ढील 2020 के प्रतिबंधों के तहत कमी और परियोजना में देरी का सामना कर रहे सरकारी विभागों के बार-बार अनुरोधों के बाद दी गई है। भारत पूरी तरह से खरीद प्रक्रिया फिर से शुरू करने के बजाय महत्वपूर्ण चीनी उपकरणों के आयात की अनुमति मामले-दर-मामले आधार पर दे सकता है। सीमा विवाद के बाद से भारत-चीन संबंधों में तनाव के कारण पूंजी, प्रौद्योगिकी और प्रतिभा का आदान-प्रदान धीमा हो गया है।

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