पीएफ जमा पर 0.05 फीसदी तक घट सकती हैं ब्याज दरें, अगले महीने फैसला
मुंबई- सरकार आपके प्रॉविडेंट फंड (पीएफ) में जमा होने वाली रकम पर चालू वित्त वर्ष के लिए ब्याज दरें घटा सकती है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) मार्च के पहले सप्ताह में होने वाली 239वीं केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) की बैठक में भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर को 2025-26 के लिए 8.25 फीसदी से घटाकर 8-8.20 फीसदी करने की योजना बना रहा है। ऐसा इसलिए, ताकि उसके फंड पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सके।
हालांकि, कुछ राज्यों में इसी साल होने वाले चुनाव इस निर्णय को प्रभावित कर सकते हैं। इसके चलते लगातार तीसरे वर्ष भी ब्याज दर अपरिवर्तित रह सकती है। संगठन अनिवार्य भविष्य निधि कवरेज के लिए वेतन सीमा बढ़ाने पर भी विचार कर रहा है। प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों के लिए पीएफ एक अनिवार्य सरकारी बचत योजना है। इसमें कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी का 12% हिस्सा कंट्रीब्यूट करता है जबकि कंपनी भी इतना हो योगदान देती है। एम्प्लॉयर के कंट्रीब्यूशन में से 8.33% कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जाता है। ईपीएफ अकाउंट में जमा रकम पर ब्याज मिलता है। ईपीएफओ की फाइनेंस, इनवेस्टमेंट और ऑडिट कमेटी की फरवरी के अंतिम हफ्ते में बैठक होगी। इसमें निवेश पर रिटर्न के आधार पर ब्याज दर का फैसला होगा। फिर सीबीटी के पास इसकी सिफारिश भेजी जाएगी।
अगर सीबीटी ब्याज दर को मंजूरी देती है तो इसे वित्त मंत्रालय से भी मंजूरी की जरूरत होगी। उसके बाद श्रम एवं रोजगार मंत्रालय इसे आधिकारिक रूप से नोटिफाई करेगा और साल के मध्य में ब्याज की राशि सब्सक्राइबर्स के खातों में डाली जाएगी। साथ ही बोर्ड वेज सीलिंग को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा कर सकता है। हालांकि अभी सीबीटी की मीटिंग का एजेंडा फाइनल नहीं हुआ है। जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने ईपीएफओ को निर्देश दिया था कि वह वेज सीलिंग पर चार महीने के भीतर विचार करे। इस सीलिंग में आखिरी बार 2014 में बदलाव हुआ था। तब से अब तक सैलरी में काफी इजाफा हो चुका है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी लेबर मिनिस्ट्री से कहा था कि वह चार महीने के अंदर इस लिमिट की समीक्षा करे।

