एअर इंडिया के ड्रीमलाइनर बी-787-8 हवाई जहाज में फिर फंसे सैकड़ों यात्री, जान बची
मुंबई- एयर इंडिया की लंदन से बेंगलुरु वाली फ्लाइट एआई-132 के लिए बोइंग के जिस ड्रीमलाइनर बी-787-8 हवाई जहाज के एक फ्यूल कंट्रोल स्विच में पायलट ने खराबी आने की शिकायत दर्ज की थी। उस फ्लाइट को पायलट लंदन से बेंगलुरु तक करीब 9:30 घंटे तक डर के साए में लाए थे। प्लेन के एक लेफ्ट फ्यूल कंट्रोल स्विच रन से कटऑफ मोड में दो बार फिसलने की शिकायत लंदन में फ्लाइट के टेक ऑफ से पहले ही सामने आ गई थी। इसके बावजूद पायलट ने इस कथित फाल्टी प्लेन के साथ 1 फरवरी की रात लंदन से दो फरवरी की सुबह बेंगलुरु तक की उड़ान भरी।
इस दौरान पायलट ने बोइंग के इस ड्रीमलाइनर प्लेन के फ्यूल कंट्रोल स्विच को अनावश्यक रूप से एक बार भी टच नहीं किया। साथ ही वह नौ घंटे से भी अधिक की इस उड़ान में पूरे रास्ते हवाई जहाज के सिस्टम पर भी अपनी नजरें गढ़ाए रहा कि हवाई जहाज का कोई भी इमरजेंसी सिस्टम कोई अलार्म तो जनरेट नहीं कर रहा है। ऐसे में सूत्रों का कहना है कि जब पायलट को बोइंग के इस ड्रीमलाइनर के फ्यूल कंट्रोल स्विच में समस्या का पता लंदन में ही चल गया था तो फिर वह 230 से अधिक यात्री और करीब 15 पायलट और क्रू मेंबर के साथ जोखिम भरी उड़ान भरकर भारत तक क्यों लाया?
डीजीसीए ने दावा किया है कि प्लेन के दोनों स्विच की जांच करने पर यह ठीक पाए गए हैं। जांच में इनका लॉकिंग टूथ (locking tooth/pawl) पूरी तरह से अपनी जगह पर था और ‘RUN’ से ‘CUTOFF’ की ओर नहीं फिसल रहा था। हालांकि, गलत दिशा में बाहरी बल लगाने के कारण स्विच ‘RUN’ से ‘CUTOFF’ की ओर खिसक गया। क्योंकि इसे गलत तरीके से उंगली या अंगूठे से दबाए जाने पर यह फिसल जाता है। लेकिन इसके बावजूद सूत्रों का कहना है कि बोइंग B787-8 प्लेन (VT-ANX) के स्विच को बदला जाएगा। बेंगलुरु में ग्राउंड किए गए इस प्लेन में दोनों नए स्विच लगाए जाएंगे। इसके बाद ही इस प्लेन को आवश्यक जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद उड़ान भरने के लिए एनओसी दी जाएगी। इस प्रक्रिया में करीब एक सप्ताह का वक्त लग सकता है।
डीजीसीए और बोइंग इंजीनियरों द्वारा की गई इस हवाई जहाज के फ्यूल स्विच की जांच में कुछ गलत नहीं निकला। साथ ही एयर इंडिया को यह सलाह भी दी गई कि वह अपने पायलट टीम के सदस्यों के बीच ‘फ्यूल कट ऑफ’ स्विच का इस्तेमाल करने के लिए बोइंग द्वारा बताई गई सही प्रक्रिया वाली एसओपी का ही पालन करे। अगर पायलट गलत तरीके से फ्यूल स्विच को ऑन-ऑफ करेंगे तो उसमें दिक्कत आ सकती है। ऐसे में क्या बोइंग के इस प्लेन को उड़ाने वाले पायलटों को इसके फ्यूल कंट्रोल स्विच को ठीक से इस्तेमाल करना नहीं आता था?
पायलट ने बोइंग-787-8 ड्रीमलाइनर के फ्यूल स्विच में आई खराबी के बारे में बेंगलुरु एयरपोर्ट पर लैंड करने के बाद ‘पायलट डिफेक्ट रिपोर्ट’ (PDR) में लिखा। इसमें एक नहीं दो चेतावनियों के बारे में लिखा गया। ऐसे में सूत्रों का कहना है कि क्या प्लेन में एक नहीं दो तरह की खराबी आई थी?

