लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स पर हो सकता है बड़ा फैसला, कई सुधार होंगे 

मुंबई- एक फरवरी को पेश होने वाले बजट में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (एलटीसीजी) को लेकर बड़े बदलाव का ऐलान हो सकता है। इसे युक्तिसंगत बनाने पर विचार किया जा रहा है। इसके अलावा इंडेक्सेशन का लाभ देने के लिए आधार साल (बेस ईयर) में भी सुधार किया जा सकता है। अभी शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन और एलटीसीजी को लेकर नियम काफी जटिल है।  

इक्विटी निवेशकों के लिए 12 महीने के बाद एलटीसीजी और उससे पहले शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स का नियम लागू होता है। अगर अचल संपत्ति को बेचा जाता है या फिर बिना सूचीबद्ध शेयर को बेचा जाता है तो 2 साल के बाद एलटीसीजी लगता है। इसी तरह ज्वैलरी और डेट वित्तीय साधनों के लिए 3 साल बाद एलटीसीजी लागू होता है। इन दोनों मामलों में 20 फीसदी का कर लगता है। 

रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्व विभाग कैपिटल गेन टैक्स में होल्डिंग अवधि और टैक्स दर को युक्तिसंगत बनाएगा। आखिरी बार साल 2017 में बेस ईयर में बदलाव किया गया था। वर्तमान में इंडेक्सेशन का लाभ 2001 के आधार पर मिल रहा है। बीते कुछ सालों में संपत्तियों की कीमत में बड़ी बढ़ोतरी हुई है, जिससे इंडेक्सेशन का बेस ईयर बदलना जरूरी हो गया है। 

इसके अलावा कैपिटल गेन ढांचे को सरल बनाना भी सरकार की प्राथमिकता है। सरकार इसे करदाताओं के लिए आसान बनाना चाहती है। अभी चल और अचल दोनों तरह की संपत्ति बेचने पर कैपिटल गेन टैक्स लगता है। एएमआरजी एंड एसोसिएट के निदेशक ओम राजपुरोहित ने कहा कि 2004 के बाद कैपिटल गेन टैक्स में कई बदलाव किए गए हैं। इससे यह काफी जटिल हो गया है। संभव है कि सरकार असेट क्लास को चल और अचल की श्रेणी में बांट दे और होल्डिंग पीरियड को भी इसके अनुरूप एक कर दे। 

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