वैश्विक वित्तीय कंपनियां भारत में बना रहीं विस्तार की योजना, मिलेंगी हजारों नौकरियां

मुंबई- देश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और नियामकीय मजबूती एवं सरकार की नीतियों के चलते वैश्विक वित्तीय कंपनियां अब भारत में अपनी वैश्विक क्षमता केंद्र स्थापित कर विस्तार की बड़ी योजनाएं बना रही हैं। इनमें प्रमुख रूप से जापान की सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉरपोरेशन और स्विटरजरलैंड की जूलियस बेयर ग्रुप हैं।

सुमितोमो मित्सुई और जूलियस बेयर अमेरिका स्थित निवेश फर्मों चार्ल्स श्वाब कॉरपोरेशन और वैनगार्ड ग्रुप के साथ मिलकर इस वर्ष चेन्नई और हैदराबाद सहित शहरों में कम से कम 1,000 लोगों को नियुक्त करने की योजना बना रही हैं।

यह विस्तार वैश्विक क्षमता केंद्रों के केंद्र के रूप में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है। अंतरराष्ट्रीय बैंक और वित्तीय कंपनियां इन केंद्रों का उपयोग प्रतिस्पर्धी लागत पर प्रतिभाओं के विशाल भंडार का लाभ उठाने के साथ-साथ प्रौद्योगिकी, जोखिम और संचालन संबंधी कार्यों को विकसित करने के लिए करती हैं जो उनके वैश्विक व्यवसायों का समर्थन करते हैं।

यह विस्तार ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिकी आव्रजन नीतियों के कारण भारतीय प्रतिभाओं को विदेशों में तैनात करना मुश्किल हो रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में बढ़ी हुई वीजा फीस और एच-1बी जैसे कुशल श्रमिक कार्यक्रमों की कड़ी निगरानी ने वैश्विक कंपनियों को कर्मचारियों को अमेरिका में स्थानांतरित करने के बजाय भारत में अधिक पदों को स्थानीय स्तर पर भरने के लिए प्रेरित किया है।

बढ़ती अनुपालन लागत और सख्त वीजा नियमों के कारण भारत के जीसीसी उद्योग की ओर यह बदलाव तेजी से हो रहा है। बैंकों को व्यापक स्तर पर नियामक क्षमता की आवश्यकता है और आज प्रतिभा, लागत व वितरण परिपक्वता का यह संयोजन केवल भारत में ही मौजूद है। कोपेनहेगन इन्फ्रास्ट्रक्चर पार्टनर्स सहित कुछ अन्य वैश्विक वित्तीय कंपनियां भी भारत में जीसीसी परिचालन स्थापित कर रही हैं।

कंपनियों द्वारा भारत में वैश्विक प्रक्रियाओं को केंद्रीकृत करने के प्रयासों के चलते कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वचालन पर जोर दिया जाएगा। हाल ही में यूबीएस ग्रुप एजी ने हैदराबाद में एक नया वैश्विक क्षमता केंद्र खोला है।

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