मर्सिडीज, और बीएमडब्ल्यू जैसी कारों की कीमतें अब घटकर रह जाएंगी आधी
मुंबई- भारत में अब यूरोप से इम्पोर्ट होने वाली कारें सस्ती हो जाएंगी। भारत सरकार ने यूरोप से आने वाली कारों पर लगने वाले इम्पोर्ट ड्यूटी को 110% से घटाकर 10% कर दिया है। हालांकि, सरकार ने इसके लिए 2.5 लाख गाड़ियों की सालाना लिमिट तय की है। ये फैसला भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का हिस्सा है। इस एग्रीमेंट का ऐलान आज (27 जनवरी) को भारत-EU समिट में किया गया। करीब 20 साल चली लंबी बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने इस समझौते को अंतिम रूप दिया है। इसे 2027 तक लागू किया जाएगा।
भारत में मर्सिडीज बेंज और BMW की ज्यादातर पॉपुलर कारें पहले से ही लोकल असेंबली के जरिए बनती हैं। यानी पार्ट्स इम्पोर्ट करके यहां जोड़कर बनाई जाती हैं। इन पर इंपोर्ट ड्यूटी केवल 15-16.5% तक लगती है, इसलिए EU के साथ FTA होने से इनकी कीमत में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा। ड्यूटी रातों-रात 110% से 10% नहीं होगी। पहले इसका ऑफिशियल नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। इसे अगले कुछ सालों में धीरे-धीरे घटाया जाएगा। इसके 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में लागू होने की संभावना है।
इस डील का फायदा केवल उन्हीं कारों को मिलेगा जो पूरी तरह यूरोप से बनकर भारत आती हैं। इनमें ज्यादातर मर्सिडीज,ऑडी, फरारी और BMW कंपनी की स्पोर्ट्स और लग्जरी कारें शामिल हैं। अभी भारत में मर्सिडीज बेंज G- वैगन कार की अनुमानित कीमत 4 करोड़ रुपए है। इस पर सरकार 110% इम्पोर्ट ड्यूटी यानी करीब 2.1 करोड़ रुपए वसूलती है। नई 10% इम्पोर्ट ड्यूटी लागू होने के बाद इसकी कीमत 1.99 करोड़ रुपए रहने की संभावना है।
इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को करीब 5 साल तक ड्यूटी कट से बाहर रखा जाएगा, ताकि घरेलू प्लेयर्स जैसे टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा को प्रोटेक्शन मिले। उसके बाद उन पर भी कट लागू हो सकता है। कार की कीमत 40,000 डॉलर से कम है, तो उस पर 70% बेसिक कस्टम ड्यूटी लगती है। कीमत 40,000 डॉलर से ज्यादा है, तो कस्टम ड्यूटी 110% तक पहुंच जाती है।

