अमेरिकी टैरिफ घटने से रत्न-आभूषण निर्यात को मिलेगी रफ्तार, आयातकों की लागत होगी कम

मुंबई। भारत-अमेरिका के ऐतिहासिक व्यापार समझौते और अमेरिकी टैरिफ के घटकर 18 फीसदी होने का रत्न एवं आभूषण उद्योग ने स्वागत किया है। इसने कहा, इससे व्यापार बढ़ेगा। विश्वास फिर से कायम होगा और पूरे उद्योग को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के अध्यक्ष किरीट भंसाली ने कहा, टैरिफ में कटौती से अमेरिकी आयातकों के लिए लागत कम होगी। हीरा आभूषण निर्माताओं को भारी राहत मिलेगी। भारतीय हीरा आभूषणों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। मांग में पुनरुद्धार होगा और परिचालन स्थिर होगा।

भंसाली ने कहा, जीजेईपीसी को उम्मीद है कि भारत द्वारा व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने के आधार पर देश से आयातित खुले हीरे और रंगीन रत्नों को अमेरिका में शून्य शुल्क आयात का लाभ मिलेगा। यह अमेरिकी पारस्परिक शुल्क सूची का हिस्सा है और इससे हीरे के निर्यात को बहुत आवश्यक समर्थन मिलेगा। जीजेईपीसी के अनुसार, अमेरिका के पारस्परिक टैरिफ ने अमेरिका के साथ व्यापार प्रवाह को बुरी तरह प्रभावित किया। पॉलिश किए गए हीरों और रंगीन रत्नों पर शुल्क अप्रैल में शून्य से बढ़कर 10 फीसदी हो गया। फिर अगस्त तक 50 फीसदी तक पहुंच गया। आभूषणों पर शुल्क 5-7 प्रतिशत से बढ़कर 55-57 फीसदी हो गया।

अखिल भारतीय रत्न एवं आभूषण घरेलू परिषद (जीजेसी) के अध्यक्ष राजेश रोकड़े ने कहा, अमेरिकी टैरिफ में कमी भारत के रत्न एवं आभूषण क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। सबबसे बड़े उपभोक्ता बाजारों में से एक में बाधाओं को कम करके, हमारे निर्यातकों को मजबूत स्थिति मिलेगी। हमारे कारीगरों की कृतियां नए दर्शकों तक पहुंचेंगी। अमेरिकी शुल्क में कटौती एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे लघु एवं मध्यम उद्यमों को सीधा लाभ होगा, जो भारत के आभूषण उद्योग की रीढ़ हैं। इस कटौती से हजारों छोटे व्यवसायों के लिए अमेरिकी बाजार में विस्तार के द्वार खुल गए हैं। इससे निर्यात में वृद्धि, राजस्व में मजबूती और सबसे महत्वपूर्ण बात, जमीनी स्तर पर रोजगार सृजन होगा।

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