विनिर्माण में हल्की तेजी के बावजूद कारोबारी भरोसा साढ़े तीन साल के निचले स्तर पर

मुंबई-नए ऑर्डरों में तेजी से वृद्धि के चलते जनवरी में विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में मामूली सुधार देखा गया। हालांकि कारोबारी विश्वास साढ़े तीन साल के सबसे निचले स्तर पर आ गया। ऐसा इसलिए, क्योंकि केवल 15 फीसदी कंपनियों ने ही आने वाले वर्ष में उत्पादन वृद्धि की उम्मीद जताई और 83 फीसदी ने कोई बदलाव नहीं होने का अनुमान लगाया।

मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) दिसंबर में दो साल के निचले स्तर 55 से बढ़कर जनवरी में 55.4 हो गया। पीएमआई की भाषा में 50 से ऊपर का आंकड़ा विस्तार को बताता है। 50 से नीचे का स्कोर कमजोरी का संकेत है। एचएसबीसी की भारत में मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा, नए ऑर्डरों, उत्पादन और रोजगार में वृद्धि के कारण विनिर्माण कंपनियों में सुधार देखा गया। इनपुट लागत में मामूली वृद्धि हुई। इससे निर्माताओं पर मार्जिन का थोड़ा दबाव पड़ा। सर्वेक्षण में शामिल प्रतिभागियों ने बताया, मांग में तेजी, नए कारोबार में वृद्धि और तकनीकी निवेश ने उत्पादन को समर्थन दिया।

कुल बिक्री में मुख्य योगदान घरेलू बाजार का रहा। हालांकि, नए निर्यात कारोबार में वृद्धि हुई, लेकिन इसकी रफ्तार धीमी रही। जिन कंपनियों के कारोबार में तेजी आई उनमें एशिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूरोप और मध्य पूर्व से बढ़ती मांग रही। माल उत्पादकों ने अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती जारी रखी। लेकिन रोजगार सृजन की रफ्तार मामूली रही, जो पिछले तीन महीनों में सबसे तेज थी। नए ऑर्डर में तेजी से वृद्धि के बावजूद, कारोबारी विश्वास कमजोर बना हुआ है। भविष्य के उत्पादन की उम्मीदें जुलाई, 2022 के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई हैं। सर्वेक्षण में पाया गया कि इनपुट कीमतों में चार महीनों में सबसे अधिक वृद्धि हुई, लेकिन आउटपुट चार्ज मुद्रास्फीति 22 महीनों के निचले स्तर पर आ गई।

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