Budget 2026: शेयर बाजार में हलचल, F&O पर टैक्स बढ़ने की खबर से सेंसेक्स–निफ्टी लुढ़के, फिर संभले
केंद्रीय बजट 2026 के दौरान जैसे ही फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने का ऐलान हुआ, भारतीय शेयर बाजार में अचानक बिकवाली का तूफान आ गया। निवेशकों में बढ़े कर बोझ की आशंका से घबराहट फैल गई और कुछ ही मिनटों में सेंसेक्स और निफ्टी सैकड़ों अंकों की गिरावट के साथ कारोबार करने लगे। हालांकि बाद में चुनिंदा शेयरों में खरीदारी लौटने से बाजार ने कुछ नुकसान की भरपाई भी कर ली।
इसके अलावा बायबैक टैक्स नियमों में बदलाव और प्रवर्तकों पर अलग-अलग कर दरों की घोषणा ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। बजट की अहमियत को देखते हुए इस बार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने रविवार को विशेष लाइव ट्रेडिंग सत्र भी आयोजित किया, जिससे निवेशकों को तुरंत प्रतिक्रिया देने का मौका मिला।
STT बढ़ते ही तेज गिरावट
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में वायदा सौदों पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स को बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत करने की घोषणा की। इस खबर के तुरंत बाद बाजार में भारी दबाव देखने को मिला। कारोबार के दौरान दोपहर करीब 12:31 बजे सेंसेक्स 2,174 अंक गिरकर 80,095 के स्तर तक फिसल गया, जबकि निफ्टी लगभग 748 अंक टूटकर 24,592 के आसपास पहुंच गया। ब्रोकरेज फर्मों के मुताबिक, डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग महंगी होने की आशंका से शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स ने तेजी से पोजीशन घटाईं, जिससे बिकवाली और तेज हो गई।
बाद में लौटी खरीदारी, बाजार संभला
तेज गिरावट के बाद कुछ ही समय में बाजार में रिकवरी भी देखने को मिली। करीब 10:39 बजे सेंसेक्स 255 अंक से ज्यादा चढ़कर 82,525 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 56 अंक बढ़कर 25,377 के आसपास कारोबार करने लगा। शुरुआती कारोबार में हालांकि दोनों सूचकांक मामूली गिरावट के साथ खुले थे, लेकिन बजट से जुड़ी घोषणाओं के बीच उतार-चढ़ाव बना रहा।
बायबैक टैक्स और प्रमोटर्स पर नई व्यवस्था
– बजट में सरकार ने शेयर बाजार से जुड़े कर नियमों में भी अहम बदलावों का प्रस्ताव रखा।
– शेयर बायबैक पर टैक्स ढांचे में संशोधन किया जाएगा ताकि दुरुपयोग रोका जा सके।
– सभी शेयरधारकों पर बायबैक को पूंजीगत लाभ के रूप में टैक्स करने का प्रस्ताव रखा गया है।
– कॉरपोरेट प्रमोटर्स पर 22 प्रतिशत टैक्स लागू करने की घोषणा हुई।
– गैर-कॉरपोरेट प्रमोटर्स के लिए कर दर 30 प्रतिशत तय की गई है।
– सरकार का कहना है कि इन कदमों से छोटे निवेशकों की सुरक्षा मजबूत होगी और बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी।
रविवार को क्यों खुला बाजार?
बजट की संवेदनशीलता को देखते हुए इस बार NSE और BSE ने 1 फरवरी को विशेष लाइव ट्रेडिंग सत्र आयोजित किया। एक्सचेंजों के मुताबिक, बड़ी नीतिगत घोषणाओं पर बाजार को तुरंत प्रतिक्रिया देने का मौका देना जरूरी था, इसलिए रविवार होने के बावजूद कारोबार जारी रखा गया। आजाद भारत के इतिहास में इससे पहले केवल एक बार रविवार को शेयर बाजार खुला था—28 फरवरी 1999 को, जब प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में बजट पेश हुआ था।
बाजार खुला रखने के पीछे तीन बड़े कारण
- तत्काल प्रतिक्रिया
निवेशक बजट घोषणाओं का असर तुरंत शेयर कीमतों में देख सके और उसी दिन निवेश से जुड़े फैसले ले सकें। - जोखिम प्रबंधन
अगर बाजार बंद रहता तो सोमवार तक इंतजार करना पड़ता, जिससे अनिश्चितता और तेज उतार-चढ़ाव का खतरा बढ़ सकता था। - पारदर्शिता
छुट्टी के दिन बजट आने पर ऑफ-मार्केट सट्टेबाजी की आशंका रहती है। लाइव ट्रेडिंग सत्र से ऐसी गतिविधियों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

