महंगाई की चिंता नहीं, लेकिन सोना-चांदी की कीमतों में आगे भी बनी रहेगी तेजी

मुंबई- अगले वित्त वर्ष में महंगाई चिंता का विषय नहीं होगी। हालांकि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं की निरंतर मांग के कारण इनकी कीमतों में वृद्धि जारी रहने की संभावना है। आपूर्ति पक्ष की बेहतर स्थितियों और जीएसटी दरों में कमी के धीरे-धीरे लागू होने से महंगाई का दृष्टिकोण अनुकूल बना हुआ है।

भविष्य में भी मुद्रास्फीति का दृष्टिकोण अनुकूल बना हुआ है। मजबूत कृषि उत्पादन, स्थिर वैश्विक कमोडिटी कीमतों और निरंतर नीतिगत सतर्कता के कारण महंगाई के लक्ष्य सीमा के भीतर रहने का अनुमान है। मुद्रा में उतार-चढ़ाव, धातु की कीमतों में उछाल और वैश्विक अनिश्चितताओं से जुड़े जोखिम बने हुए हैं। इसके लिए निरंतर निगरानी और अनुकूल नीतिगत प्रतिक्रियाओं की जरूरत है।

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं की निरंतर मांग के कारण इनके भाव बढ़ते रहने की संभावना है, जब तक कि स्थायी शांति स्थापित नहीं हो जाती और व्यापार युद्ध समाप्त नहीं हो जाते। देश की मुद्रास्फीति दर 2026-27 में 2025-26 की तुलना में अधिक रहने की संभावना है।

उच्च स्तर पर सोना और चांदी का भाव

2025 के दौरान सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गईं। यह बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश के रूप में मजबूत मांग को दर्शाता है। यह तेजी डॉलर के कमजोर होने, लगातार नकारात्मक वास्तविक ब्याज दरों की आशंकाओं और देशों के बीच तनाव और वित्तीय जोखिमों के बढ़ते आकलन से प्रेरित थी। 2025 में सोने और चांदी की कीमतों में आई तेजी शायद बरकरार न रहे। 2024-25 में आयात में कच्चे तेल, सोने और पेट्रोलियम उत्पादों का दबदबा बना रहा। यह कुल आयात का एक तिहाई से अधिक हिस्सा है। सोने के आयात मूल्य में 27.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। आयात में वृद्धि का कारण सोने की कीमतों में 38.2 फीसदी की तेजी का योगदान रहा।

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