बीमारी पर होने वाले खर्च को बचाने के लिए रहें फिट, यह है इसका तरीका

मुंबई-बढ़ती उम्र को देखते हुए, हम लंबे समय तक जी रहे हैं। हमें खराब स्वास्थ्य के साथ लंबे समय तक जीने के बारे में चिंतित होना चाहिए। ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य पर खर्च समय के साथ और बढ़ता ही जा रहा है।

मैं कई सालों बाद अस्पताल में अपने एक मित्र से मिलने गया, जिसके पिता की सर्जरी होने वाली थी। मैं अस्पताल के रिसेप्शन से लेकर वहाँ की सभी सुविधाओं से काफी हैरान था। इस दौरान मुझे कुछ बहुत ही दिलचस्प देखने को मिला। पहले बुजुर्ग अस्पताल में भर्ती होते थे और नौजवान उन्हें देखने जाते थे। अब तो युवा भी अस्पताल में बड़े पैमाने पर भर्ती होने लगे हैं।

मैंने 70 वर्षीय व्यक्ति से बातचीत की और जानना चाहा कि क्या वह किसी चेकअप के लिए अस्पताल में आए हैं? उन्होंने तुरंत जवाब दिया कि उनके बेटे का कुछ दिन पहले दिल की बीमारी के लिए ऑपरेशन हुआ था, जिसमें दो स्टेंट लगे थे। उनका 38 वर्षीय बेटा शादीशुदा था। वह एक सॉफ्टवेयर मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता था। उसका जीवन तनावपूर्ण था। शर्मा जी भी खुल कर बात करने वाले बूढ़े व्यक्ति थे, जो आजकल युवाओं के लाइफस्टाइल के तौर तरीके से परेशान थे। शर्मा जी ने कहा, मेरा बेटा कॉलेज में रहने तक शारीरिक रूप से बहुत सक्रिय था। जैसे ही उसे नौकरी मिली, वह डेस्क पर ही रहने लगा और उसका वजन बढ़ने लगा।

द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, भारत में लगभग 50 प्रतिशत युवा शारीरिक गतिविधियों से दूर हैं जबकि महिलाओं के लिए यह आंकड़ा 57 प्रतिशत है। 45 वर्ष से कम आयु के लोगों में हृदय संबंधी स्वास्थ्य समस्याएं होना अब आम बात है। बहुत से लोग मोटे होते हैं, उन्हें मधुमेह, उच्च ब्लड प्रेशर भी होता है। ये सभी आपस में जुड़ी हुई स्वास्थ्य समस्याएं हैं, जो खराब खान-पान की आदतों और शारीरिक स्वास्थ्य से उत्पन्न होती हैं। ऐसे में हमारे पास स्वास्थ्य बीमा है जो बीमारियों में वित्तीय सहायता देने के लिए कम लागत वाले बीमा प्रोडक्ट्स ऑफर करते हैं। बीमा उपयोगी तो है, लेकिन बीमा को बैकअप के रूप में लिया जाना चाहिए, न कि जीवनशैली संबंधी समस्याओं से निजात पाने के लिए।

भारत में स्वास्थ्य सेवा की लागत लगातार बढ़ रही है। भारत में स्वास्थ्य बीमा और निजी क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवा के या जाने से यह आभास होता है कि स्वास्थ्य सेवा सस्ती है, लेकिन ऐसा नहीं है। कुछ दशक पहले स्वास्थ्य सेवा पर होने वाले मामूली खर्चों से अधिकांश परिवार अपनी आय का लगभग 5 से 10 फीसदी स्वास्थ्य सेवा पर खर्च करते हैं। स्वास्थ्य सेवा से मेरा मतलब जिम जाने या व्यायाम उपकरण या डॉक्टर के पास जाने जैसे खर्चों से नहीं है, बल्कि ये दवाइयों और रेगुलर डायग्नोसिस पर होने वाले खर्च हैं। हम स्वास्थ्य सेवा के लिए मामूली नियमित खर्चों से लेकर लंबा खर्च का सफर तय कर चुके हैं। अगर पहले एक बड़ी स्वास्थ्य सेवा के डर से घर के बजट और बचत में गड़बड़ी होती थी, तो अब भी ऐसा ही होता है।

बहरहाल, जब मेरा दोस्त आया तो मैंने उसके चेहरे पर चिंता के भाव देखे और हम उसके पिता के ठीक होने के बारे में बात करने लगे। हालाँकि उसके पिता सीजीएचएस के अंतर्गत आते थे, फिर भी अस्पताल में रहने के कारण उसे अपनी जेब से कुछ न कुछ खर्च उठाना पड़ता है। मेरा दोस्त पैसे से ठीक-ठाक है, लेकिन अपने माता-पिता और खुद पर बढ़ते चिकित्सा खर्चों को लेकर उसकी चिंताएं थीं क्योंकि हाल ही में उसे मधुमेह होने का पता चला है। कोविड के बाद से लोगों को अपने स्वास्थ्य को गंभीरता से लेना चाहिए और चीजों के खराब होने का इंतजार नहीं करना चाहिए। अपनी आय का 5-10 फीसदी हिस्सा स्वास्थ्य सेवा की जरूरतों के लिए अलग रखें। इसमें बीमा प्रीमियम के साथ-साथ जेब से स्वास्थ्य सेवा खर्चों से निपटने के लिए बचत भी शामिल हो सकती है।

स्वास्थ्य सेवा के डर को दूर करने का दूसरा और सबसे पुराना जांचा परखा तरीका है सक्रिय और स्वस्थ रहना। अगर हम आहार और फिटनेस पर ध्यान दें तो हमारी बहुत सी चिकित्सा समस्याओं का समाधान हो सकता है। बढ़ती उम्र को देखते हुए, हम न केवल लंबे समय तक जी रहे हैं, बल्कि हमें खराब स्वास्थ्य के साथ लंबे समय तक जीने के बारे में भी चिंतित होना चाहिए, जो समय के साथ और महंगा हो सकता है। अपने स्वास्थ्य को संयोग पर न छोड़ें। इससे पहले कि यह आपको कंट्रोल करे, आप इसे कंट्रोल करें। बीमारी की रोकथाम इलाज से सदैव बेहतर है। चाहे आप उम्मीद से ज्यादा और स्वस्थ जीवन जी रहे हों। किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हों या कुछ बीमारियों के लिए चल रहे उपचार का भुगतान कर रहे हों, चिकित्सा देखभाल से जुड़ी लागत बढ़ सकती हैं। अगर आप या आपका कोई प्रियजन इस चुनौती का सामना कर रहा है, तो शायद यह समय उन विकल्पों को तलाशने का है जो आपको अपने खर्चों को पूरा करने के साथ-साथ अपने बैंक खाते पर बोझ कम करने का काम करते हैं।

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