गेहूं के भंडार में आएगी गिरावट, फिर भी रहेगा पर्याप्त 

मुंबई- सरकारी गोदामों में गेहूं का भंडार अगले महीने की शुरुआत में मौजूदा स्तर से लगभग 13% गिर जाएगा। बावजूद इसके कल्याणकारी योजनाओं के लिए यह पर्याप्त होगा। उपभोक्ता मामलों और खाद्य मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा, दिसंबर के लिए सरकारी गोदामों में गेहूं का स्टॉक छह साल में सबसे कम हो गया, क्योंकि बढ़ती मांग और गिरते भंडार के कारण कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गईं।  

एक जनवरी तक लगभग 15.9 मिलियन टन गेहूं उपलब्ध होगा। यह 13.8 मिलियन की बफर जरूरत से अधिक है। अभी तक लगभग 18.2 मिलियन टन उपलब्ध है। सरकार ने कहा कि पिछले साल की तुलना में गेहूं की फसल की बुवाई में काफी वृद्धि हुई है। 

गेंहू का सरकारी स्टॉक लगातार कम होने की वजह से अब आपकी थाली और महंगी हो सकती है. सरकारी गोदामों में गेहूं का स्टॉक अब 6 साल के निचले स्तर तक पहुंच गया है. वहीं भारी डिमांड के चलते गेहूं की कीमतों में भी उछाल आया है. इसकी वजह से बाजार में गेंहू के आटे की कीमत भी बढ़ी है. इसका असर महंगाई की मार झेल रहे देश के करोड़ों लोगों पर पड़ेगा. 

सरकार साल 2022-23 में OMSS के जरिए 20-30 लाख टन गेहूं की बिक्री कर सकती है. दरअसल, सूत्रों का कहना है कि गेंहू की बिक्री पर सरकार जनवरी में फैसला ले सकती है. बता दें कि सरकार ने 2020-21 में 25 लाख टन गेहूं और 2021-22 में 70 लाख टन गेहूं की बिक्री की थी. 

आपको बता दें कि गेहूं का सरकारी स्टॉक अब 1.9 करोड़ टन बचा है जो दिसंबर 2016 के बाद सबसे कम है. 2014 और 2015 में सूखे के कारण गेहूं का स्टॉक घटकर कम हो गया था. इससे दिसंबर 2016 में गेहूं का स्टॉक 1.65 करोड़ टन रह गया था. वहीं पिछले साल 1 दिसंबर 2021 को गेहूं का स्टॉक 3.785 करोड़ टन था. 

हाल में गेहूं की बाजारी कीमत 25 फीसदी से भी ज्यादा बढ़ी है, इससे आटे की कीमतों में भी वृद्धि हुई है. आंकड़ों के मुताबिक, सरकार के पास 1 अक्टूबर 2022 को 2.27 करोड़ टन गेहूं का स्टॉक था. जबकि बफर नियम के अनुसार इस समय गेहूं का सरकारी स्टॉक 2.05 करोड़ टन होना चाहिए था. 2016 में भी गेहूं का स्टॉक कम होने की वजह से इसकी कीमतें बढ़ी थी. 

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