महंगाई के बजाय वृद्धि पर फोकस, फरवरी में आरबीआई रोक सकता है दर वृद्धि

मुंबई- महंगाई दरों में भारी गिरावट से अब सरकार महंगाई के बजाय वृद्धि पर फोकस कर सकती है। ऐसे में आरबीआई फरवरी में होने वाली अपनी मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में दरों को बढ़ाने की रफ्तार रोक सकता है। इससे सरकार को वृद्धि को बढ़ाने में मदद मिलेगी। दरअसल, आरबीआई को महंगाई दर का लक्ष्य 4 फीसदी मिला है जिसमें दो फीसदी कम और ज्यादा के साथ इसे बनाए रखने की जिम्मेदारी है। हालांकि, लंबे समय से यह आरबीआई की ऊपरी सीमा से भी ज्यादा स्तर पर रही है। एमपीसी की अगली बैठक 6-8 फरवरी को होनी है। 

नवंबर में खुदरा महंगाई उम्मीद से ज्यादा गिरकर 11 महीने के निचले स्तर 5.88% पर आ गई। पिछले साल दिसंबर के बाद पहली बार यह 6% से नीचे आई। दूसरी ओर, थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित महंगाई भी नवंबर में 21 महीने के निचले स्तर 5.85% पर आ गई। यह अक्तूबर में 8.39% थी। पिछले हफ्ते, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बेंचमार्क रेपो दर को 0.35 फीसदी बढ़ाकर 6.25% कर दिया। सरकार के नीति निर्माताओं को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक अब मौद्रिक सख्ती को रोक देगा। 

अधिकारियों का कहना है कि वैश्विक मंदी से कमजोर आर्थिक सुधार को नुकसान पहुंचाने और सहायता प्रदान करने की अधिक आवश्यकता को लेकर सरकार में चिंता बढ़ रही है। एमपीसी के 6 सदस्यीय टीम में दो सदस्यों ने यह सुनिश्चित करने के लिए नीति के खिलाफ मतदान किया कि महंगाई लक्ष्य के भीतर बनी रहे और विकास का समर्थन करते हुए आगे बढ़े। एक अधिकारी ने कहा कि सरकार ने महंगाई के खिलाफ अपनी लड़ाई में आरबीआई का समर्थन किया और कच्चे तेल सहित वस्तुओं की कीमतों को कम करने के लिए कई उपाय किए। 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को लोकसभा में महंगाई को और नीचे लाने का वादा किया। उन्होंने लोकसभा में पूरक अनुदान मांगों के पहले बैच पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा, हम आम लोगों की खातिर महंगाई और नीचे लाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार आवश्यक वस्तुओं की कीमतों की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। अमेरिका में महंगाई नवंबर में 12 महीनों में सबसे धीमी गति से बढ़ी, जिससे फेडरल रिजर्व की मुश्किलें भी बढ़ गईं। उसने भी अपनी आक्रामक दरों को बढ़ाने की योजना में कटौती कर दी और बुधवार को 0.50 फीसदी की बढ़त की। इससे आरबीआई पर दरें बढ़ाने का दबाव भी कम होगा। 

अर्थव्यवस्था को समर्थन देने की जरूरत 

अधिकारी ने कहा कि विकास के बारे में चिंताएं बढ़नी शुरू हो गई हैं। नवीनतम आंकड़ों से संकेत मिलता है कि विकसित दुनिया में मंदी का असर दिखना शुरू हो गया है। अर्थव्यवस्था को समर्थन देने की जरूरत है। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि फरवरी में पेश होने वाले आगामी बजट में विकास प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक होगा। 

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