छोटी बचत योजनाओं पर बढ़ सकती है ब्याज दरें, 2 वर्षों से नहीं हुआ कोई बदलाव 

मुंबई- छोटी बचत योजनाओं (एसएससी) पर अगले महीने से ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद है। इस महीने के अंत में सरकार इसका फैसला करेगी। इससे इन योजनाओं में ज्यादा निवेशक आ सकते हैं। ऐसा हुआ तो सरकार को अतिरिक्त उधारी लेने की कम जरूरत पड़ेगी।  

पिछले 2 वर्षों (अप्रैल, 2020) से इस पर मिलने वाले ब्याज की दरें जस की तस हैं। रेटिंग एजेंसी इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने बताया कि हम उम्मीद करते हैं कि चालू वित्तवर्ष की दूसरी तिमाही में इन योजनाओं की ब्याज दरों को बढ़ाने का फैसला लिया जा सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि सरकारी प्रतिभूतियों की ब्याज दरें बढ़ गई हैं।  

उनका कहना है कि दूसरी तिमाही में आरबीआई रेपो दरों में 0.60 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है जिससे 10 साल की सरकारी प्रतिभूतियों का ब्याज 7.75 से 8 फीसदी के बीच जा सकता है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वित्तमंत्रालय अगले महीने से इन योजनाओं की ब्याज दरों में 0.5 से 0.75 फीसदी का इजाफा कर सकता है।  

आईसीआईसीआई बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री समीर नारंग कहते हैं कि सरकार का जो ट्रेजरी बिल है, उसका एक साल का ब्याज 6.23 फीसदी के आस-पास है। साथ ही जो उधारी सरकार बाजार से लेती है, वह 7 फीसदी से ज्यादा ब्याज पर होता है। ऐसे में एसएससी पर उसे ज्यादा ब्याज देना होगा। हालांकि यह भी उधारी ही है। ऐसे में उम्मीद है कि बेंचमार्क के आस-पास निवेशकों को रिटर्न देने के लिए उसे कम से कम आधा फीसदी ब्याज एसएससी पर बढ़ाना होगा। 

छोटी बचत योजनाओं के ब्याज पर पर हर तिमाही में समीक्षा होती है। इस बार की समीक्षा में आरबीआई द्वारा दो बार में 0.90 फीसदी रेपो दर बढ़ाए जाने पर मुख्य फोकस होगा। आरबीआई के रेपो दर बढ़ने से फिक्स्ड डिपॉजिट पर बैंकों ने ब्याज दरें बढ़ा दी हैं। इससे निवेशकों को छोटी बचत योजनाओं में बनाए रखने और आकर्षित करने के लिए सरकार भी ऐसा ही फैसला ले सकती है। 

छोटी बचत योजनाओं में सबसे ज्यादा ब्याज सुकन्या समृद्धि योजना पर मिलता है जो 7.6 फीसदी है। पब्लिक प्रॉविडेंट फंड पर 7.1, राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र पर 6.8 फीसदी, वरिष्ठ नागरिक टैक्स बचत पर 7.4 फीसदी और किसान विकास पत्र पर 6.9 फीसदी ब्याज मिल रहा है। यह सभी लंबी अवधि वाली योजनाएं हैं। 

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