थोक महंगाई 24 सालों के रिकॉर्ड पर, सब्जियों, फलों, दूध का ज्यादा योगदान

नई दिल्ली। थोक महंगाई की दर ने 24 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। 1998 में थोक मूल्य सूचकांक आधारित (डब्ल्यूपीआई) 15.32 फीसदी पर थी, जो अप्रैल, 2022 में 15.08 फीसदी पर पहुंच गई है।

पिछले साल अप्रैल में यह 10.74 फीसदी पर थी। यह लगातार 13 वें महीने में दो अंकों से ज्यादा बनी है। मार्च में इसकी दर 14.55 फीसदी थी जबकि फरवरी में थोड़ा कम होकर 13.11 फीसदी पर आ गई थी। इसमें सबसे ज्यादा योगदान करने वाली चीजों में ईंधन, बिजली और खाने पीने के सामान रहे हैं। अप्रैल में खुदरा महंगाई की दर 7.79 फीसदी रही थी जो पिछले 8 वर्षों में सबसे ज्यादा रही। 2014 में यह 8.32 फीसदी पर थी।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल, 2021 से थोक महंगाई की दर दो अंकों में बनी हुई है। अप्रैल, 2022 में महंगाई में सबसे ज्यादा योगदान करने वाली सामानों में खाद्य वस्तुएं रहीं, जो 8.35 फीसदी थी। मार्च में यह 8.06 फीसदी पर थी। मैन्यूफैक्चरिंग का योगदान मार्च में 10.71 फीसदी की तुलना में अप्रैल में बढ़कर 10.85 फीसदी हो गया। जबकि ईंधन और पावर की महंगाई दर 34.52 से बढ़कर 38.66 फीसदी हो गई।

अप्रैल, 2022 में महंगाई बढ़ाने में मुख्य रूप से मिनरल ऑयल, बुनियादी धातुएं, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस रहे। इनके अलावा खाने-पीने और बिना खाने-पीने वाली वस्तुएं, खाद्य उत्पाद और केमिकल उत्पाद भी महंगाई बढ़ाने में सहायक रहे। खाने पीने के सामान की कीमतें इसलिए बढ़ीं, क्योंकि सब्जियां, गेहूं, फल और आलू की कीमतों में ज्यादा तेजी रही। हालांकि मांस, मछली और अंडे सस्ते रहे। मार्च में इनकी महंगाई दर 9.42 फीसदी थी जो अप्रैल में 4.5 फीसदी पर आ गई।

इससे पहले इसी महीने महंगाई को काबू में करने के लिए रिजर्व बैंक ने रेपो दर में बढ़ोतरी की थी। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि बावजूद इसके, अगले 4-6 महीने तक महंगाई की दर ऊपर ही रहेगी। आरबीआई ने इसका लक्ष्य 2 से 6 फीसदी के बीच रखा है। उधर, रेटिंग एजेंसी इक्रा ने अनुमान लगाया है कि जून में 0.4 और अगस्त में 0.35 फीसदी रेपो दर बढ़ सकती है।

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