जीएसटी संग्रह जनवरी में 6.2 फीसदी बढ़कर तीन महीने के शीर्ष 1.93 लाख करोड़ पर

मुंबई- बढ़ी हुई खपत और वस्तुओं की कीमतों में कमी से जनवरी में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह 6.2 फीसदी बढ़कर तीन महीने के शीर्ष 1.93 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। अक्तूबर में 1.96 लाख करोड़ रुपये का टैक्स मिला था। नवंबर में 1.70 लाख करोड़ और दिसंबर में 1.74 लाख करोड़ रुपये रहा था। जनवरी, 2025 में 1,82,094 करोड़ रहा था।

हालांकि, इस साल जनवरी में रिफंड 3.1 फीसदी घटकर 22,665 करोड़ रुपये रह गया है। इससे शुद्ध संग्रह 7.6 फीसदी तेजी के साथ 1.71 लाख करोड़ रुपये रहा है। घरेलू लेनदेन से सकल कर संग्रह 4.8 प्रतिशत बढ़कर 1.41 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। आयात राजस्व 10.1 प्रतिशत बढ़कर 52,253 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल लगभग 375 वस्तुओं पर जीएसटी की दरें घटा दी गईं थी। इससे आम आदमी की वस्तुएं सस्ती हो गई थीं। साथ ही, 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत के चार कर स्लैबों को मिलाकर 5 और 18 प्रतिशत के दो स्लैब बना दिए गए। इनमें से कुछ चुनिंदा अति विलासिता की वस्तुओं और तंबाकू उत्पादों के लिए 40 प्रतिशत का उच्चतम स्लैब निर्धारित किया गया।

जनवरी में तंबाकू उत्पादों पर उपकर संग्रह 5,768 करोड़ रुपये रहा। पिछले वर्ष जनवरी में यह संग्रह 13,009 करोड़ रुपये था। अप्रैल, 2025 से जनवरी, 2026 के दौरान सकल जीएसटी संग्रह 18.43 लाख करोड़ रुपये रहा। यह एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में 8.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है और मोटे तौर पर नॉमिनल जीडीपी वृद्धि के अनुरूप है। ईवाई इंडिया के कर साझेदार सौरभ अग्रवाल ने कहा, राजस्व में लगातार वृद्धि से पता चलता है कि सितंबर, 2025 में दर युक्तिकरण जैसे नीतिगत बदलाव अर्थव्यवस्था को सफलतापूर्वक औपचारिक रूप दे रहे हैं।

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