सोने के बदले कर्ज का बाजार दो साल में दोगुना, ₹15.6 लाख करोड़ पहुंचा गोल्ड लोन पोर्टफोलियो
मुंबई- सोने की कीमतों में जोरदार तेजी के बीच सेफ हेवन माने जाने वाले इस सेगमेंट में बैंकों और अन्य कर्जदाताओं की दिलचस्पी बढ़ने से देश में गोल्ड लोन पोर्टफोलियो दो साल में करीब दोगुना होकर नवंबर 2025 तक 15.6 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। नवंबर 2024 में यह 11 लाख करोड़ रुपये था
रिपोर्ट के अनुसार, सोने के एवज में कर्ज पोर्टफोलियो नवंबर, 2023 में 7.9 लाख करोड़ रुपये था। कर्ज देने में बढ़ी आसानी ने कुल खुदरा उधार पोर्टफोलियो में सोने के ऋणों के हिस्से को भी एक वर्ष पहले के 8.1 फीसदी से बढ़ाकर नवंबर के अंत में 9.7 फीसदी कर दिया है। सोने की बढ़ती कीमतों और मजबूत गारंटी के कारण पोर्टफोलियो बढ़ रहे हैं। कीमतों में उछाल से कर्ज लेने वालों की योग्यता भी बढ़ गई है।सक्रिय ऋणों की संख्या में मात्र 10.3 फीसदी की वृद्धि हुई है। यह नवंबर तक 2.5 लाख रुपये से अधिक के ऋण कुल ऋणों का लगभग आधा हिस्सा हैं, जो मार्च, 2023 में 36.4 फीसदी थे।
56 फीसदी से अधिक गोल्ड लोन पुरुषों ने लिए हैं। ऋण देने की तेज गति के कारण 2024-25 के ऋणों की मात्रा और मूल्य 2025-26 के पहले आठ महीनों में ही पार हो गए हैं। सरकारी बैंकों की इसमें 60 फीसदी हिस्सा है। गोल्ड लोन देने वाली गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की हिस्सेदारी कुल बकाया में 8.1 फीसदी है। ऋण चुकौती में सुधार हुआ है और नवंबर, 2025 तक सभी बकाया श्रेणियों में तनावग्रस्त पोर्टफोलियो में कमी आई है।
कर्ज का तीन चौथाई हिस्सा दक्षिणी राज्यों में
कर्ज का तीन चौथाई हिस्सा दक्षिणी राज्यों में केंद्रित है और शीर्ष 10 राज्यों में 90 फीसदी से अधिक बकाया है। नवंबर तक गुजरात में सर्वाधिक 67 फीसदी की वृद्धि रही। कर्नाटक और महाराष्ट्र में 50 फीसदी की तेजी रही। तनावग्रस्त ऋणों के मामले में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और ओडिशा में बकाया ऋणों का अनुपात अधिक है।

