ICICI बैंक में कैसे शुरू हुआ देश का सबसे चर्चित बैंकिंग घोटाला, चंदा कोचर से वीडियोकॉन तक पूरा मामला

मुंबई-  2009 में जब चंदा कोचर ने आईसीआईसीआई बैंक के एमडी -सीईओ का पद संभाला तो हर किसी को बैंक में महिलाओं की भूमिका को लेकर एक नया दौर का पता चला। उस समय तक इतने बड़े पदों पर भारत में महिलाओं का पहुंचना एक अजूबा ही था। चंदा कोचर ने जिस तरह से भार संभाला और जिस तरह से बैंक को ऊंचाई दी, वह काबिल-ए-तारीफ था लेकिन इसके भीतर वो क्या कर रही थीं, इससे सब लोग अंजान थे।

वीडियोकॉन एक कंपनी थी। इसमें चेयरमैन वेणुगोपाल धूत के साथ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर ने भागीदारी के साथ कारोबार शुरू किया। यहीं से यह एक ऐसा गठबंधन बना, जो बाद में आईसीआईसीआई बैंक को दुनिया के नक्शे पर एक बड़े घोटालेबाज वाले बैंक के रूप में स्थापित किया। कोचर पर वीडियोकॉन समूह की कंपनियों को ₹3,250 करोड़ के ऋण स्वीकृत करने के लिए आपराधिक साजिश और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है।

इस घोटाले में निवेश के रूप में रिश्वत लेकर नुपावर रिन्यूएबल्स (दीपक कोचर की कंपनी) को लाभ पहुंचाया गया, जिससे आईसीआईसीआई बैंक को भारी नुकसान हुआ और सीबीआई एवं ईडी ने जांच शुरू की। कोचर और अन्य पर अपने पद का दुरुपयोग करके अनुचित व्यक्तिगत लाभ लेने का आरोप है। जांच में हितों के टकराव और प्रशासनिक विफलताओं को उजागर किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप गिरफ्तारियां और संपत्ति जब्त की गई हैं। लेन-देन के बदले में, उनके पति दीपक कोचर की कंपनी नुपावर रिन्यूएबल्स को कथित तौर पर धूत से अवैध रिश्वत (निवेश/ऋण) प्राप्त हुई।

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