एनएसई के समझौते पर सेबी सैद्धांतिक रूप से सहमत, आईपीओ की राह लगभग साफ

मुंबई। पूंजी बाजार नियामक सेबी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के अनुचित बाजार पहुंच मामले के संबंध में दायर समझौते की याचिका पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गया है। इससे उम्मीद है कि एक्सचेंज के आईपीओ को सेबी जल्द मंजूरी दे सकता है। सेबी चेयरमैन तुहिनकांत पांडे ने कहा, सरकार ने एनएसई के एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके तहत बड़ी कंपनियां आईपीओ में 2.5 फीसदी हिस्सा बेच सकेंगी।

मुंबई में एक कार्यक्रम में पांडे ने कहा, एनएसई का समझौता आवेदन सेबी की विभिन्न समितियों के समक्ष प्रक्रियाधीन है, लेकिन सैद्धांतिक रूप से हम समझौते पर सहमत हैं। एनएसई 2016 से आईपीओ लाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन को-लोकेशन मामले के कारण इसे अब तक सेबी से मंजूरी नहीं मिल पाई है। इस मामले में आरोप लगाया गया था कि चुनिंदा ब्रोकरों को एक्सचेंज तक तरजीही पहुंच प्रदान की गई थी। लंबे समय तक चले कानूनी विवाद के बाद एक्सचेंज ने आरोपों को निपटाने और आईपीओ के साथ आगे बढ़ने के लिए 2025 में 1,388 करोड़ रुपये का भुगतान करने की पेशकश की।

पांडे ने कुछ समय पहले कहा था कि आईपीओ की मंजूरी एक महीने के भीतर मिल जाएगी। एनएसई का आईपीओ भारतीय बाजारों में आने वाले सबसे बड़े आईपीओ में से एक होने की उम्मीद है। सेबी ने पिछले साल 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य वाली कंपनियों के लिए आईपीओ में न्यूनतम 5 फीसदी हिस्से की सीमा को घटाकर 2.5 फीसदी कर दिया था। इससे एनएसई और जियो जैसी कंपनियों को राहत मिलेगी। वे पहले चरण में केवल 2.5 फीसदी हिस्सा बेच सकेंगी। से घटाकर 2.5 प्रतिशत कर दिया था, जिससे एनएसई और सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी रिलायंस जियो जैसी कंपनियों को मदद मिलने की उम्मीद है।

रेगुलेटरी क्लियरेंस मिलने के बाद अब NSE मार्च के अंत तक अपने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) यानी लिस्टिंग पेपर्स फाइल कर सकता है। इसके लिए एक्सचेंज ने इन्वेस्टमेंट बैंकर्स और लॉ फर्म्स के साथ बातचीत शुरू कर दी है। उम्मीद है कि इसी महीने के अंत तक सेबी की ओर से NOC जारी कर दी जाएगी, जिसके बाद सलाहकारों की औपचारिक नियुक्ति होगी। NSE देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। NSE पर आरोप था कि एक्सचेंज के कुछ चुनिंदा ब्रोकर्स को बाकी निवेशकों के मुकाबले मार्केट डेटा तक ‘फास्ट एक्सेस’ या कुछ सेकंड पहले जानकारी मिल रही थी। एक्सचेंज के डेटा सेंटर में ही इन ब्रोकर्स के सर्वर लगाने की सुविधा (को-लोकेशन) दी गई थी, जिसका कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कर कुछ ब्रोकर्स ने फायदा कमाया।

आईपीओ की सुगबुगाहट तेज होते ही अनलिस्टेड और ग्रे मार्केट में NSE के शेयरों की डिमांड बढ़ गई है। पिछले कुछ दिनों में इसके शेयरों की कीमत 10 से 15% तक उछल गई है। फिलहाल अनलिस्टेड मार्केट में NSE की वैल्यूएशन करीब 5 लाख करोड़ रुपए आंकी जा रही है। इसके शेयर 2,095 रुपए के आसपास ट्रेड कर रहे हैं। हालांकि, आधिकारिक वैल्यूएशन का पता लिस्टिंग के समय ही चलेगा।

NSE शेयरहोल्डर्स की संख्या के लिहाज से भारत की सबसे बड़ी अनलिस्टेड कंपनी है। इसके कुल 1,77,807 शेयरहोल्डर्स हैं। आईपीओ के दौरान इतने बड़े बेस को मैनेज करना और बैंकों व विदेशी फंड्स जैसे संस्थागत निवेशकों को एग्जिट का मौका देना वकीलों के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

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