भारत के लिए साइबर असुरक्षा और आय असमानता सबसे बड़े खतरे, आर्थिक मंदी भी जोखिमों में शामिल
मुंबई- देशों के बीच चल रहे आर्थिक टकराव इस साल दुनिया के लिए सबसे बड़े जोखिम के रूप में सामने आ रहे हैं। हालांकि, भारत के लिए साइबर असुरक्षा सबसे बड़ा खतरा बनकर उभर रहा है। इनके साथ आय असमानता, कम सार्वजनिक सेवाएं-सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक मंदी और राज्य आधारित सशस्त्र संघर्ष भी समस्याओं वाले कारण हैं।
दावोस वार्षिक सम्मेलन से पहले सालाना वैश्विक जोखिम रिपोर्ट में विश्व आर्थिक मंच ने कहा, भू-आर्थिक टकराव दो वर्षों के लिए सबसे बड़ा जोखिम बनने के लिए आठ पायदान ऊपर चढ़ गया है। इसके बाद गलत सूचना और दुष्प्रचार, सामाजिक ध्रुवीकरण, चरम मौसम और अंतरराज्यीय संघर्ष का स्थान है। 10 वर्षों की लंबी अवधि में मौसम की घटनाएं सबसे बड़ा जोखिम हैं। जैव विविधता का नुकसान व पारिस्थितिकी तंत्र का पतन, पृथ्वी प्रणालियों में परिवर्तन, गलत सूचना और दुष्प्रचार व कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रौद्योगिकियों के विपरीत परिणाम भी प्रमुख खतरे के रूप में उभर रहे हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूईएफ) ने महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को वैश्विक स्तर पर युद्ध का एक नया मोर्चा बताते हुए कहा, नदियों और जलाशयों पर नियंत्रण रखने वाली सरकारें पड़ोसी देशों की कीमत पर अपनी आबादी के लिए पानी मोड़ने के लिए प्रलोभित हो सकती हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि जल सुरक्षा संबंधी चिंताएं विश्व भर में बढ़ती रहने की संभावना है। अगले दशक में संभावित तनाव में भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी बेसिन या अफगानिस्तान की ओर से कोश टेपा नहर का निर्माण शामिल हो सकता है। इससे तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान में आमू दरिया नदी का प्रवाह कम हो सकता है।
यूपीआई दुनियाभर की सरकारों के लिए उदाहरण
विश्व आर्थिक फोरम ने यूपीआई को सरकारों के लिए अच्छा उदाहरण बताया। इससे वे अपने बैंकिंग सिस्टम को अधिक आकर्षक और भविष्य में संभावित वैश्विक ऋण या वित्तीय संकटों के सामने अधिक लचीला बनाने के लिए कदम उठा सकते हैं। डीपफेक का प्रसार शुरू हो गया है और राजनीति और चुनावी प्रक्रियाओं पर इनका प्रभाव बढ़ रहा है। इनका दुरुपयोग लोकतांत्रिक संस्थानों में विश्वास को कमजोर कर सकता है। इससे राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ सकता है और राजनीतिक हिंसा या सामाजिक उथल-पुथल भड़क सकती है।
सोशल मीडिया, डीपफेक से भी खतरा
रिपोर्ट में कहा गया है, अमेरिका, आयरलैंड, नीदरलैंड, पाकिस्तान, जापान, भारत और अर्जेंटीना में हाल में हुए चुनावों में सोशल मीडिया पर इस तरह की मनगढ़ंत सामग्री का सामना करना पड़ा है। इसमें काल्पनिक घटनाओं का चित्रण किया गया या राजनीतिक उम्मीदवारों को बदनाम किया गया है। अगले सप्ताह दावोस में होने वाली डब्ल्यूईएफ वार्षिक बैठक में इसके निष्कर्षों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।
दो वर्षों में अशांत रहेगी दुनिया
सर्वेक्षण में शामिल आधे लोगों ने कहा, अगले दो वर्षों में दुनिया अशांत या तूफानी रहेगी। यह पिछले वर्ष की तुलना में 14 फीसदी अधिक है। 40 प्रतिशत ने माना स्थिति कम से कम अस्थिर रहेगी। अगले 10 वर्षों में 57 फीसदी लोग अशांत या तूफानी दुनिया की उम्मीद करते हैं। 32 फीसदी अस्थिरता की उम्मीद करते हैं। प्रमुख शक्तियां अपने हितों के क्षेत्रों को सुरक्षित करने की कोशिश कर रही हैं, जिससे एक नई प्रतिस्पर्धी व्यवस्था आकार ले रही है।

