चीन को भारत का निर्यात 5.5 अरब डॉलर बढ़ा, लेकिन व्यापार घाटा रिकॉर्ड 116 अरब डॉलर पर
मुंबई-भारत का चीन को निर्यात 2024 की तुलना में 2025 में 5.5 अरब डॉलर बढ़ा है। हालांकि, व्यापार घाटा रिकॉर्ड 116.12 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह 2023 के बाद दूसरी बार 100 अरब डॉलर से ज्यादा है। चीनी सीमा शुल्क विभाग के सालाना आंकड़ों के मुताबिक, द्विपक्षीय व्यापार भी 2025 में सार्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचकर 155.62 अरब डॉलर हो गया।
आंकड़ों के अनुसार, भारत का चीन को निर्यात कुछ वर्षों से बढ़ने के लिए संघर्ष कर रहा था। पिछले वर्ष जनवरी से दिसंबर के बीच चीन को कुल 19.75 अरब डॉलर का निर्यात हुआ है। यह 2024 की तुलना में 9.7 फीसदी अधिक है। इसी समय, चीन का भारत को निर्यात 12.8 फीसदी बढ़कर 135.87 अरब डॉलर हो गया। दोनों देशों के बीच व्यापार में सुधार हो रहा है।
भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 2024 में 99.21 अरब डॉलर था। इसमें चीन का निर्यात 113.45 अरब डॉलर था। भारत से चीन को होने वाला निर्यात 14.25 अरब डॉलर पर स्थिर रहा। चीन के वार्षिक व्यापार आंकड़े जनवरी से दिसंबर तक के होते हैं। भारत मार्च से अप्रैल तक के आंकड़े जारी करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय निर्यात में 5.5 अरब डॉलर की वृद्धि मामूली है, लेकिन महत्वपूर्ण है। यह एक संरचनात्मक बदलाव की ओर इशारा करती है। तेल खली, समुद्री उत्पाद, दूरसंचार उपकरण और मसाले जैसी वस्तुएं कठिन चीनी बाजार में अपनी जगह बना रही हैं, जो घरेलू खपत बढ़ाने के लिए संघर्ष कर रहा है।
भारत वर्षों से चीन से अपने आईटी, फार्मा और कृषि उत्पादों के व्यापार क्षेत्रों को खोलने की मांग कर रहा है, जो भारत के मजबूत क्षेत्र हैं। 2025 में व्यापार अधिशेष बढ़कर लगभग 1.2 लाख करोड़ डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो 2024 की तुलना में 20 फीसदी अधिक है। इसमें निर्यात 3.77 लाख करोड़ डॉलर और आयात 2.58 लाख करोड़ डॉलर रहा। सीमा शुल्क के सामान्य प्रशासन के उप मंत्री वांग जून ने व्यापार संबंधी चुनौतियों के बावजूद पिछले वर्ष चीन के मजबूत निर्यात प्रदर्शन का श्रेय सहायक नीतियों और देश की औद्योगिक क्षमता को दिया।

