जनधन से यूपीआई तक: वित्तीय समावेशन अभियान ने करोड़ों भारतीयों की जिंदगी बदली
मुंबई- देश के महत्वाकांक्षी वित्तीय समावेशन अभियान ने करोड़ों नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और ग्रामीण आबादी के आर्थिक परिदृश्य को मौलिक रूप से बदल दिया है। वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम नागराजू ने मंगलवार को एक कार्यक्रम में कहा, जनधन योजना के तहत 11 साल में 53 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले गए हैं। इनमें से 72 फीसदी ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हैं।
नागराजू ने कहा, इन खातों में महिलाओं का हिस्सा 56 फीसदी है। 28 अगस्त, 2014 को जनधन योजना शुरू की गई थी। यह देश के इतिहास के सबसे परिवर्तनकारी अभियान है। आंकड़ों के अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में जो बदलाव आया है, वह यह है कि महिलाएं अब परिवार के आर्थिक विकास में खुद को समान भागीदार मानने लगी हैं। इससे महिलाओं को बहुत सशक्तिकरण मिला है। इन खातों में जमा राशि बढ़कर 2.29 लाख करोड़ रुपये हो गई है। इससे यह देश की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन पहल बन गई है। यह कार्यक्रम 6 लाख बैंकिंग संवाददाताओं के माध्यम से संचालित होता है, जो गांवों और मोहल्लों में जाकर बैंकिंग सेवाएं प्रदान करते हैं।
नागराजू ने कहा, भारत अब डिजिटल लेनदेन में विश्व में अग्रणी है, जो वैश्विक वास्तविक समय भुगतान का लगभग 50 फीसदी है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ने दिसंबर 2024 में 21 अरब से अधिक लेनदेन किए, जो कार्ड लेनदेन से 101 फीसदी अधिक है। सरकार ने इस डिजिटल पहल का लाभ उठाकर उन लोगों तक ऋण और बीमा कवरेज पहुंचाया है जिन्हें पहले ये सुविधाएं नहीं मिल पाती थीं। मुद्रा योजना के तहत अप्रैल, 2015 से अब तक लगभग 38 लाख करोड़ रुपये के 56.3 करोड़ से अधिक ऋण स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 67 फीसदी महिला उद्यमियों को दिए गए हैं।
अब भी सुधार की बहुत ज्यादा जरूरत
नागराजू ने कहा, इन उपलब्धियों के बावजूद कई क्षेत्रों में अब भी सुधार की जरूरत है। इसमें प्रारंभिक चरण में खोले गए खातों के लिए ग्राहक को जानें (केवाईसी) को अपडेट करने, वित्तीय साक्षरता कार्यक्रमों को मजबूत करने और साइबर सुरक्षा उपायों को बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। वित्तीय समावेशन सुनिश्चित करने से वित्तीय साक्षरता प्राप्त होती है। यह बदले में ऋण पहुंच, जोखिम कवरेज और पेंशन प्रावधानों के माध्यम से वित्तीय सुरक्षा का निर्माण करती है। यदि इन तीनों को वित्तीय समावेशन एजेंडा में शामिल किया जा सके, तो देश अगले शताब्दी की ओर बढ़ने के लिए अधिक सुरक्षित, अधिक मजबूत और अधिक आत्मविश्वासी होगा।

