10 साल में तीन गुना मजबूत हुआ बैंकिंग सिस्टम, जमा 241 लाख करोड़ के पार
मुंबई- देश का बैंकिंग सिस्टम पिछले 10 वर्षों में अच्छी तरह से मजबूत हुआ है। इस दौरान जमा और कर्ज में तीन गुना की तेजी आई है। 2014-15 में जमा 85.3 लाख करोड़ रुपये से तीन गुना बढ़कर 2024-25 में 241 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। इसी दौरान कर्ज भी 67.4 लाख करोड़ से बढ़कर 191 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है।
एसबीआई की सोमवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्ज देने की प्रक्रिया फिर से तेज हुई है। बैंकों की कुल संपत्ति देश की जीडीपी के मुकाबले बढ़कर 94 फीसदी हो गई है, जो पहले 77 फीसदी थी। इससे पता चलता है कि देश की वित्तीय स्थिति और बैंकिंग प्रणाली मजबूत हुई है। देश के कई राज्यों में अब परिवार सिर्फ बचत ही नहीं कर रहे, बल्कि निवेश की ओर भी रुख करने लगे हैं। गुजरात, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में बैंक में जमा राशि का एक हिस्सा तेजी से शेयर बाजार और अन्य वित्तीय बाजारों की ओर जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2004-05 में बैंकों की जमा राशि केवल 18.4 लाख करोड़ रुपये थी जो अब 13 गुना से ज्यादा बढ़ी है। कर्ज भी 11.5 लाख करोड़ रुपये से 16 गुना से ज्यादा बढ़ा है। इससे साफ है कि बैंकिंग प्रणाली का आकार काफी बढ़ गया है। हालांकि, कर्ज देने की रफ्तार जमा की तुलना में तेज रही है, जिससे कर्ज और जमा का अनुपात 2020-21 में 69 फीसदी से बढ़कर 2024-25 में 79 फीसदी हो गया। सरकारी बैंक भी धीरे-धीरे फिर से ज्यादा कर्ज देने लगे हैं। पहले कुछ वर्षों में उनका हिस्सा घटा था, लेकिन अब स्थिति सुधर रही है। 2025-26 की पहली छमाही में बैंकों में नई जमा राशि 8.6 लाख करोड़ से घटकर 8.1 लाख करोड़ रह गई। इस दौरान कर्ज बढ़कर 7.6 लाख करोड़ रुपये हो गया। सरकारी बैंकों का मुनाफा बढ़ने के पीछे ब्याज से होने वाली कमाई, सरकारी बॉन्ड से लाभ और खुदरा तथा छोटे कारोबारियों को दिए गए कर्ज की अहम भूमिका रही है।
प्रीपेमेंट पर कर्जदार दे रहे जोर
6 महीने से 1 वर्ष और 1-3 वर्ष की अवधि के लिए जमा और ऋण के परिपक्वता प्रोफाइल अब बदल रही है। इस अवधि में कर्ज लेने वाले 35 फीसदी उधारकर्ताओं ने लोन के प्रीपेमेंट पर जोर दिया है।
असुरक्षित कर्जों में तेज वृद्धि
असुरक्षित ऋण 2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 46.9 लाख करोड़ हो गए हैं। 2024-25 में इनकी हिस्सेदारी 17.7 फीसदी से बढ़कर 24.5 फीसदी हो गई। संवेदनशील क्षेत्रों में ऋण का दायरा लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में यह 50 लाख करोड़ रुपये (कुल ऋणों का लगभग 27 फीसदी) तक पहुंच गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में कुल ऋण में से लगभग 50 फीसदी हिस्सा निजी क्षेत्र के बैंकों का है। सरकारी बैंकों का हिस्सा 47 फीसदी है।
दो दशकों में रोजगार बढ़कर दोगुना हुआ
दो दशकों में बैंकिंग क्षेत्र में रोजगार बढ़कर दोगुना हुआ है। कुल कर्मचारियों की संख्या 8.6 लाख से बढ़कर 18.1 लाख हो गई है। निजी बैंकों हिस्सा 46 फीसदी और सरकारी बैंकों का 42 फीसदी है। अधिकारियों की हिस्सेदारी 36 फीसदी से बढ़कर 76% हो गई है।
ऋण वितरण में क्षेत्रीय असमानताएं
ऋण वितरण में लगातार क्षेत्रीय असमानताएं बनी हुई हैं। दक्षिणी, पश्चिमी और उत्तरी क्षेत्रों में उच्च ऋण वितरण अनुपात (सीडी अनुपात) का दबदबा है। पूर्वी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र पिछड़े हुए हैं, जो असमान विकास को दर्शाता है। ओडिशा, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे कुछ बड़े राज्यों में सीडी अनुपात 52% से कम है। 75 जिले ऐसे हैं जिनका सीडी अनुपात 150 से ऊपर है और 226 जिले ऐसे हैं जिनका सीडी अनुपात 50 से नीचे है। लगभग 46 फीसदी जिलों का सीडी अनुपात 50-100 के बीच है।
43 फीसदी जमा शीर्ष-10 जिलों में
43 फीसदी जमा और 49 फीसदी ऋण शीर्ष 10 जिलों में हैं। शीर्ष-100 जिलों में 75% जमा और 77% ऋण है। शेष 643 जिलों में 25% कारोबार है। जमा के मामले में शीर्ष 25 जिलों में, जो ऋण के मामले में शीर्ष 25 जिलों में नहीं हैं, वे हैं: नागपुर, पटना, उत्तर 24 परगना और त्रिवेंद्रम। इसी प्रकार, चंडीगढ़, इंदौर, लुधियाना और रायपुर जैसे 4 जिले ऋण के मामले में शीर्ष 25 जिलों में हैं, लेकिन जमा के मामले में शीर्ष 25 जिलों में नहीं हैं।
312.2 लाख करोड़ रुपये हुआ आकार
बैंकों की परिसंपत्तियों का आकार 2004-05 में मात्र 23.6 लाख करोड़ रुपये था। अब 312.2 लाख करोड़ रुपये हो गया है। -दावा न की गई जमा राशि (खाता और राशि दोनों) 2015 से 9 गुना से अधिक बढ़ गई। 2015-25 के दौरान 13 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में औसत सीडी अनुपात 2004-14 के औसत सीडी अनुपात की तुलना में कम हुई है। लेकिन तमिलनाडु में सीडी अनुपात 100% से ऊपर बना हुआ है। ग्रामीण, अर्ध-शहरी और शहरी क्षेत्रों में जमा और ऋण वृद्धि दोनों में उल्लेखनीय तेजी देखी गई है, लेकिन 2025-26 की पहली छमाही में महानगरों में गिरावट आई है।
इन जिलों में सबसे अधिक बढ़ा जमा
मुंबई शहर 60,377 करोड़
बंगलूरू शहर 53,611 करोड़
नई दिल्ली 48,624 करोड़
चेन्नई 30,503 करोड़
रंगारेड्डी 27,279 करोड़
गुरुग्राम 22,809 करोड़
पुणे 20,003 करोड़
अहमदाबाद 12,775 करोड़
गौतमबुद्ध नगर 11,008 करोड़
(कुल जमा में मुंबई का हिस्सा 9.44 फीसदी, दिल्ली का 8.99 फीसदी, बंगलूरू का 5.67 फीसदी, मुंबई उपनगर का 5.60 फीसदी, चेन्नई का 3.07 फीसदी और पुणे का 2.55 फीसदी है।)
इनका जमा घटा
जयपुर ग्रामीण 9,667 करोड़
नीमका थाना 6,616 करोड़
जोधपुर ग्रामीण 5,839 करोड़
रमनगारा 4,867 करोड़
गंगापुर 3,732 करोड़
अनूपगढ़ 3,398 करोड़
हनुमकोंडा 2,588 करोड़
केकरी 2,554 करोड़
लखनऊ 1,133 करोड़

