ग्रामीण इलाकों की आर्थिक स्थिति में मजबूत सुधार, खपत और आय में हुई एक साल में तेज वृद्धि

मुंबई- देश के ग्रामीण इलाके की आर्थिक स्थिति में पिछले एक साल में मजबूत वृद्धि हुई है। उपभोग में तेजी आई है। आय में भी अच्छी बढ़ोतरी हुई है। ग्रामीण परिवारों का आशावाद पिछले सभी चरणों की तुलना में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। नाबार्ड के आठवें ग्रामीण आर्थिक स्थिति एवं मत सर्वेक्षण में यह जानकारी दी गई है।

नाबार्ड के सर्वे के अनुसार ग्रामीण परिवारों की वास्तविक खरीद शक्ति में बढ़ोतरी हुई है। लगभग 80 फीसदी परिवारों ने लगातार अधिक उपभोग किया है। मासिक आय का 67.3 फीसदी हिस्सा उपभोग पर खर्च हो रहा है। सर्वेक्षण शुरू होने के बाद का यह सबसे बड़ा स्तर है। यह संकेत देता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मांग मजबूत और बड़ी है, जो किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है।

ग्रामीण परिवारों में से 42.2 प्रतिशत की आय बढ़ी है, जो अब तक के सभी सर्वेक्षणों में बेहतर प्रदर्शन है। केवल 15.7 प्रतिशत की आय घटी है। यह अब तक का सबसे न्यूनतम स्तर है। भविष्य की संभावनाएं मजबूत नजर आ रही हैं। 75.9 प्रतिशत को उम्मीद है कि उनकी आय अगले वर्ष बढ़ेगी जो सितंबर, 2024 के बाद से सबसे ज्यादा होगी।

निवेश गतिविधियों में तेजी

पिछले वर्ष की तुलना में 29.3 प्रतिशत परिवारों का पूंजी निवेश बढ़ा है। यह पिछले किसी भी चरण से अधिक है। यह कृषि और गैर-कृषि क्षेत्रों में संपत्ति सृजन में नई तेजी को दर्शाता है। निवेश में यह तेजी मजबूत उपभोग और आय में वृद्धि के कारण है। 58.3 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों ने केवल औपचारिक ऋण स्रोतों का ही उपयोग किया है। यह अब तक के सभी सर्वेक्षणों में सबसे उच्च स्तर है। सितंबर, 2024 में यह 48.7 प्रतिशत था। अनौपचारिक ऋण का हिस्सा 20 प्रतिशत है। यह दर्शाता है कि औपचारिक ऋण की पहुंच को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास की जरूरत है।

सरकारी योजनाओं से स्थिर हुई ग्रामीण मांग

सरकारी कल्याणकारी योजनाएं ग्रामीण उपभोग को सहारा देती हैं, लेकिन निर्भरता नहीं बढ़ातीं। औसत ग्रामीण परिवार की आय का 10 फीसदी हिस्सा सब्सिडी या सरकारी ट्रांसफर से पूरा होता है। कुछ परिवारों में यह 20 फीसदी तक पहुंच जाता है। औसत महंगाई संबंधी धारणा सर्वेक्षण शुरू होने के बाद पहली बार घटकर 4 फीसदी से नीचे 3.77 फीसदी पर आ गई है। 84.2 फीसदी परिवारों ने कहा, महंगाई 5 फीसदी से नीचे रहेगी। कम महंगाई ने वास्तविक आय और क्रय शक्ति को बढ़ावा दिया है।

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