कॉरपोरेट बॉन्ड : एफडी से ज्यादा रिटर्न, बाजार से कम जोखिम
मुंबई- कभी बड़े संस्थानों तक सीमित रहे बॉन्ड अब सुरक्षित व स्थिर रिटर्न चाहने वाले आम निवेशकों के पसंदीदा विकल्प बन गए हैं। ज्यादातर लोगों के दिमाग में निवेश के रूप में अक्सर फिक्स्ड डिपॉजिट, सोना या शेयर बाजार ही आता है। लेकिन एक और विकल्प है और वह है कॉर्पोरेट बॉन्ड।
ग्रिप इन्वेस्ट के सीईओ निखिल अग्रवाल कहते हैं कि नियमों और टेक्नोलॉजी में बदलावों के कारण बॉन्ड अब आम निवेशकों के लिए पहले से कहीं ज्यादा सुलभ, सुरक्षित और लाभदायक बन गए हैं। ये धीरे-धीरे लोकप्रिय होता जा रहा है। भारत का कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार तेजी से बढ़ रहा है। यह 2014 में सिर्फ तीन अरब डॉलर का बाजार था लेकिन 2024 में यह 147 अरब डॉलर तक पहुंच गया। पिछले एक दशक में लगभग 54 फीसदी की सालाना वृद्धि हुई है। यह सिर्फ वृद्धि नहीं, बल्कि निवेशकों के बढ़ते विश्वास और एक परिपक्व वित्तीय सिस्टम का सबूत भी है।
इन वजहों से भरोसेमंद बन रहा बॉन्ड बाजार
सेबी का सख्त नियम : केवल मजबूत कंपनियां ही बॉन्ड जारी कर सकती हैं।
अनिवार्य क्रेडिट रेटिंग : बॉन्ड की रेटिंग क्रिसिल और इक्रा जैसी एजेंसियां करती हैं, जिससे आपको जोखिम समझने में मदद मिलती है।
पारदर्शी खुलासा : कंपनियां नियमित फाइनेंशियल अपडेट देती हैं ताकि निवेशक हमेशा सूचित रहें।
संस्थागत भागीदारी : म्यूचुअल फंड और बैंक जैसे बड़े निवेशक भी सक्रिय रूप से शामिल हैं, जिससे बाजार में भरोसा और स्थिरता आती है।
ज़्यादा लिक्विडिटी : डीमैट आधारित ट्रेडिंग के कारण जरूरत पड़ने पर आसानी से बाहर निकल सकते हैं। ग्रिप जैसे कई प्लेटफॉर्म जरूरत पड़ने पर कभी भी बेचने की सुविधा देते हैं, जिससे तरलता सुनिश्चित होती है।
हाल तक कॉरपोरेट बॉन्ड में निवेश अधिकतर संस्थागत निवेशकों तक सीमित था। ऐसा इसलिए क्योंकि न्यूनतम निवेश 10 लाख या उससे अधिक था। 2023 में सेबी ने आम निवेशकों के लिए भी रास्ता खोल दिया। अब आप कई बॉन्ड में केवल 10,000 रुपये से निवेश कर सकते हैं। कुछ में तो 1,000 से भी कम निवेश संभव है। स्टॉक एक्सचेंज के जरिये एक दिन में ही निपटान होता है। बॉन्ड सीधे डीमैट खाते में भेज दिए जाते हैं। इन बदलावों ने खुदरा निवेशकों की भागीदारी में तेजी ला दी है।
-ग्रिप इन्वेस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ पांच तिमाहियों में निवेश में 5 गुना वृद्धि हुई है। 71 फीसदी लोग फिर से निवेश करते हैं। कई निवेशकों ने 15 माह में लगातार फिर से निवेश करके 10 लाख या उससे ज्यादा का पोर्टफोलियो बना लिया। फिक्स्ड डिपॉजिट कम रिटर्न और बाजार में उतार-चढ़ाव ज्यादा होने से कॉरपोरेट बॉन्ड एक ऐसा निवेश विकल्प है जो स्थिरता, पारदर्शिता और अच्छे रिटर्न का संतुलन देता है।
चाहे आप बेहद सतर्क बचतकर्ता हों, या अपने पोर्टफोलियो में विविधता चाहते हों। बॉन्ड पर गंभीरता से विचार करना बहुत मायने रखता है। डिजिटल तरीके से निवेश करना आसान हो गया है। इससे भरोसा बढ़ा है। ऐसे में यह विकल्प आज के निवेशकों के लिए एकदम उपयुक्त है। बॉन्ड में निवेश का युग अब आ चुका है।

