Union Budget 2026: छोटे और सीमांत किसानों पर सरकार का बड़ा दांव, ग्रामीण आय बढ़ाने के लिए व्यापक पैकेज

केंद्रीय बजट 2026 में सरकार ने कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए बड़े और दूरगामी कदम उठाए हैं। इस बार छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने को बजट का केंद्रीय लक्ष्य बनाया गया है। कृषि मंत्रालय के लिए रिकॉर्ड स्तर पर ₹1.40 लाख करोड़ से अधिक का आवंटन कर यह साफ कर दिया गया है कि आने वाले वर्षों में सरकार का फोकस केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि किसानों को बाजार, तकनीक और वैल्यू चेन से जोड़कर उनकी कमाई को टिकाऊ तरीके से बढ़ाने पर होगा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में मत्स्य पालन, पशुपालन, बागवानी, तटीय फसलों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कृषि सलाह जैसे कई नए कार्यक्रमों की घोषणा की, जिनसे ग्रामीण इलाकों में रोजगार और उद्यमिता को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

कृषि मंत्रालय को मिला ₹1.40 लाख करोड़ से ज्यादा का बजट
वित्त वर्ष 2026–27 के लिए कृषि मंत्रालय को कुल ₹1.40 लाख करोड़ से अधिक का आवंटन किया गया है, जो पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि मानी जा रही है। सरकार का कहना है कि इस राशि का इस्तेमाल सिंचाई, अनुसंधान, बीज विकास, डिजिटल खेती, मत्स्य पालन और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा। सरकार का मुख्य लक्ष्य छोटे और सीमांत किसानों की आय में निरंतर बढ़ोतरी करना और उन्हें आधुनिक कृषि प्रणालियों से जोड़ना है।

मत्स्य पालन को मिलेगा नया विस्तार
बजट में मत्स्य क्षेत्र के लिए बड़ा रोडमैप पेश किया गया है। देशभर में 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों का एकीकृत विकास किया जाएगा। तटीय इलाकों में फिशरीज वैल्यू चेन को मजबूत किया जाएगा, ताकि मछुआरों को बेहतर दाम मिल सकें। कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के विस्तार पर जोर दिया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे समुद्री और अंतर्देशीय मत्स्य पालन दोनों को गति मिलेगी।

पशुपालन के लिए लोन-आधारित सब्सिडी योजना
– वित्त मंत्री ने पशुपालन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए नई लोन-आधारित सब्सिडी योजनाओं का ऐलान किया है।
– डेयरी, पोल्ट्री और अन्य पशुधन उद्यमों के आधुनिकीकरण को प्रोत्साहन मिलेगा।
– स्टार्टअप और महिलाओं की अगुवाई वाले समूहों को बाजार से जोड़ा जाएगा।
– पशुधन किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को विशेष समर्थन दिया जाएगा।
– ‘पशुधन उद्यमों’ के संवर्धन और विस्तार पर सरकार फोकस करेगी।

काजू, कोको, नारियल और चंदन पर खास योजना
तटीय और पहाड़ी क्षेत्रों की उच्च-मूल्य फसलों को लेकर सरकार ने विशेष रणनीति पेश की है। नारियल उत्पादन को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए नई नारियल संवर्धन योजना लाई जाएगी। भारतीय काजू और कोको के लिए समर्पित राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू होंगे, जिनका लक्ष्य इन्हें वैश्विक ब्रांड बनाना है। चंदन की खेती को फिर से प्रतिष्ठा दिलाने के लिए राज्यों के साथ मिलकर काम किया जाएगा। अखरोट और बादाम जैसी बागवानी फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए भी विशेष योजनाएं लागू होंगी।

AI आधारित भारत-VISTAAR कार्यक्रम
किसानों को तकनीकी सहायता देने के लिए सरकार ने भारत-VISTAAR नामक बहुभाषी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल शुरू करने की घोषणा की है। इस प्लेटफॉर्म के जरिए किसानों को फसल चयन, मौसम पूर्वानुमान, रोग नियंत्रण, बाजार भाव और संसाधन प्रबंधन से जुड़ी सलाह मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे उत्पादकता बढ़ेगी और खेती अधिक लाभकारी बनेगी।

ग्रामीण महिलाओं के लिए SHE-Marts
ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए स्वयं सहायता समूहों की अगुवाई वाले ‘SHE-Marts’ शुरू किए जाएंगे। इनके जरिए महिलाओं द्वारा बनाए गए कृषि और ग्रामीण उत्पादों को सीधे बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

पिछले बजट से तुलना
वित्त वर्ष 2024–25 में कृषि मंत्रालय को ₹1,32,469 करोड़ का बजट मिला था, जिसमें कृषि अनुसंधान, नई बीज किस्मों और प्राकृतिक खेती पर जोर था। 2025–26 के बजट में इन पहलों को ‘धन-धान्य योजना’ जैसे मिशनों के जरिए आगे बढ़ाया गया। अब बजट 2026–27 में सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और वैल्यू चेन आधारित कृषि मॉडल पर साफ फोकस दिखाया है।

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