Budget 2026-27: रक्षा बजट में 8% की बढ़ोतरी, चीन-पाकिस्तान से निपटने को सेना के आधुनिकीकरण पर बड़ा दांव

इसमें से करीब ₹2.1 लाख करोड़ रुपये सेना के आधुनिकीकरण यानी नए हथियार, प्लेटफॉर्म, तकनीक और उपकरणों की खरीद के लिए निर्धारित किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इसका मकसद थलसेना, नौसेना और वायुसेना को भविष्य के युद्ध-परिदृश्यों के लिए तैयार करना है।

एयरक्राफ्ट पार्ट्स पर कस्टम ड्यूटी में राहत
बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की कि नागरिक और प्रशिक्षण विमानों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कल-पुर्जों पर बेसिक कस्टम ड्यूटी में छूट दी जाएगी। इसके साथ ही रक्षा क्षेत्र की इकाइयों द्वारा मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) के लिए उपयोग किए जाने वाले एयरक्राफ्ट पार्ट्स बनाने के वास्ते आयात किए जाने वाले कच्चे माल पर भी सीमा शुल्क से राहत दी जाएगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे भारत में विमानन और रक्षा MRO हब विकसित करने में मदद मिलेगी और आयात पर निर्भरता कम होगी।

राजस्व, पूंजीगत व्यय और पेंशन में बड़ा बदलाव
रक्षा मंत्रालय (सिविल)
रक्षा मंत्रालय के नागरिक हिस्से का बजट मामूली घटकर ₹28,554.61 करोड़ रह गया है, जिसमें 0.45 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

रक्षा सेवाएं – राजस्व खर्च
सेना, नौसेना और वायुसेना के दैनिक संचालन से जुड़े खर्च के लिए आवंटन बढ़कर ₹3,65,478.98 करोड़ हो गया है। इसमें 17.24 प्रतिशत की तेज़ वृद्धि हुई है।

पूंजीगत व्यय में सबसे ज्यादा उछाल
रक्षा पूंजीगत व्यय यानी नए हथियार, लड़ाकू विमान, युद्धपोत और आधुनिक सिस्टम खरीदने के लिए बजट में सबसे बड़ा इजाफा किया गया है। यह 21.84 प्रतिशत बढ़कर ₹2,19,306.47 करोड़ तक पहुंच गया है।

रक्षा पेंशन
सेवानिवृत्त सैनिकों के लिए पेंशन आवंटन भी 6.53 प्रतिशत बढ़ाकर ₹1,71,338.22 करोड़ कर दिया गया है। इन आंकड़ों से साफ है कि सरकार एक ओर सैनिकों के कल्याण पर ध्यान दे रही है, तो दूसरी ओर भविष्य की सैन्य जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है।

पिछले बजट से तुलना
वित्त वर्ष 2024–25 में रक्षा क्षेत्र के लिए कुल ₹6,21,940 करोड़ का प्रावधान किया गया था। इसके मुकाबले मौजूदा बजट में करीब 9–10 प्रतिशत की वृद्धि दिखाई देती है, जो दर्शाती है कि सरकार लगातार सेना के आधुनिकीकरण को प्राथमिकता दे रही है।

रणनीतिक संदेश क्या है?
विश्लेषकों के मुताबिक, सीमा पर चीन के साथ तनाव, पाकिस्तान से जुड़े सुरक्षा जोखिम और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते समीकरणों के बीच भारत अपनी रक्षा तैयारियों को तेज करना चाहता है। स्वदेशी रक्षा उत्पादन, तकनीकी आत्मनिर्भरता और लॉन्ग-टर्म सैन्य क्षमताओं पर जोर देकर सरकार ने यह संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में रक्षा क्षेत्र देश की रणनीतिक नीति का प्रमुख स्तंभ रहेगा।

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