एनएसई के 10,000 करोड़ रुपये के आईपीओ को सेबी से मिल गया एनओसी
मुंबई- बाजार नियामक सेबी ने देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) को प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ के अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) दे दिया है। आईपीओ योजना एक दशक से अधिक समय से अटकी हुई थी। एक्सचेंज ने पहले 2016 में मौजूदा शेयरधारकों द्वारा बिक्री प्रस्ताव से लगभग 10,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए दस्तावेजों का मसौदा दाखिल किया था। हालांकि, सेबी ने गवर्नेंस संबंधी खामियों और को-लोकेशन मामले से संबंधित नियामक चिंताओं के कारण मंजूरी नहीं दी थी।
एनएसई ने पिछले एक दशक में मंजूरी के लिए कई बार नियामक से संपर्क किया था। इस महीने की शुरुआत में सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि नियामक ने अनुचित बाजार पहुंच मामले में एनएसई की दायर निपटान याचिका को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इसका मतलब था कि अब आईपीओ के लिए मंजूरी मिल सकती है। एनएसई ने जून, 2025 में निपटान आवेदन दाखिल किया था।
NSE ने पहली बार 2016 में IPO के लिए DRHP फाइल किया था, लेकिन रेगुलेटरी और लीगल मुद्दों की वजह से वापस लेना पड़ा था। उसके बाद से को-लोकेशन और डार्क फाइबर जैसे मामलों में जांच चल रही थी, जिसने IPO को रोक रखा था। NSE ने जून 2025 में सेबी के सामने सेटलमेंट एप्लीकेशन दाखिल की थी और करीब 1,400 करोड़ रुपए सेटलमेंट अमाउंट देने को तैयार हो गई है। नवंबर 2025 की फाइनेंशियल रिपोर्ट में NSE ने 1,297 करोड़ रुपए का प्रोविजन किया था, साथ ही पहले से 100 करोड़ रुपए जमा थे।
सेबी के कई डिपार्टमेंट्स ने सेटलमेंट पर इन-प्रिंसिपल सहमति दे दी है। अब यह मामला हाई पावर्ड एडवाइजरी कमिटी (HPAC) के पास जाएगा और फिर सेबी के दो व्होल टाइम मेंबर्स के पैनल से फाइनल अप्रूवल मिलेगा। अप्रूवल के बाद सुप्रीम कोर्ट से केस वापस लिया जा सकता है। लीगल एक्सपर्ट्स का कहना है कि SAT में NSE जीत चुकी थी और सुप्रीम कोर्ट में भी SEBI को राहत नहीं मिली थी, लेकिन शेयरहोल्डर्स के दबाव में NSE ने सेटलमेंट चुना ताकि मामला बंद हो।

