SEC ने अदालत का रुख किया, अदाणी को समन भेजने के लिए कूटनीतिक रास्ता छोड़ने की तैयारी
मुंबई- अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (SEC) ने गौतम अदाणी और सागर अदाणी को समन तामील कराने में आ रही बाधाओं को लेकर अब सीधे अमेरिकी संघीय अदालत का दरवाज़ा खटखटाया है। भारत सरकार द्वारा समन जारी करने के उसके अधिकार पर आपत्ति जताए जाने के बाद, SEC ने अदालत से अनुरोध किया है कि कूटनीतिक प्रक्रियाओं को दरकिनार करते हुए अडानी बंधुओं को उनके अमेरिका स्थित वकीलों और कारोबारी ई-मेल के ज़रिये नोटिस भेजने की अनुमति दी जाए।
SEC ने 21 जनवरी को न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट की अमेरिकी जिला अदालत में दाखिल याचिका में कहा कि उसे अब हेग कन्वेंशन के तहत नोटिस की तामील पूरी होने की कोई उम्मीद नहीं है। इसके साथ ही एजेंसी ने फरवरी 2025 से अपनाई जा रही संधि-आधारित प्रक्रिया को प्रभावी रूप से छोड़ दिया है। यह फैसला 14 महीनों से चल रही उस कोशिश में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है, जिसमें अडानी समूह को 75 करोड़ डॉलर के बॉन्ड इश्यू से जुड़े आरोपों की औपचारिक सूचना देने का प्रयास किया जा रहा था। इस बॉन्ड ऑफरिंग के जरिये अमेरिकी निवेशकों से करीब 17.5 करोड़ डॉलर जुटाए गए थे।
SEC के मुताबिक, भारत के विधि और न्याय मंत्रालय के साथ करीब एक साल तक चली पत्राचार और बातचीत के बावजूद कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया। अदालत में दाखिल मेमोरेंडम में आयोग ने कहा कि मंत्रालय के रुख और समय बीतने को देखते हुए अब हेग कन्वेंशन के ज़रिये नोटिस तामील संभव नहीं लगती। SEC को 14 दिसंबर 2025 को भारत के विधि और न्याय मंत्रालय की ओर से पत्र मिले थे, जिनमें यह आपत्ति जताई गई थी कि अमेरिकी नियमों के तहत जारी समन वैध श्रेणी में नहीं आते।
SEC ने इस आपत्ति को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इसका हेग कन्वेंशन से कोई लेना-देना नहीं है। आयोग के अनुसार, हेग कन्वेंशन केवल नोटिस तामील की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है, न कि प्रवर्तन कार्रवाई शुरू करने के अधिकार को। SEC ने यह भी कहा कि मंत्रालय का रुख ऐसा प्रतीत होता है मानो आयोग के पास समन जारी करने या हेग कन्वेंशन लागू करने का अधिकार ही नहीं है, जबकि संबंधित नियमों का इससे कोई संबंध नहीं है।
सागर अदाणी की ओर से हेक्कर फिंक एलएलपी और गौतम अडानी की ओर से किर्कलैंड एंड एलिस एलएलपी तथा क्विन इमैनुएल उरक्वार्ट एंड सुलिवन एलएलपी इस मामले में काउंसल के रूप में सामने आ चुके हैं। SEC का कहना है कि स्थापित वकीलों के माध्यम से नोटिस भेजना लगभग तय रूप से प्रतिवादियों तक सूचना पहुंचा देगा।

